Sawan Mangala Gauri Vrat 2026: 4 अगस्त को सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि
TV9 Bharatvarsh August 01, 2026 11:43 PM

Mangala Gauri Vrat 2026 Dates: हिंदू धर्म में सावन का पवित्र महीना देवों के देव महादेव और माता पार्वती की भक्ति के लिए बहुत ही फलदायी माना गया है. सावन में जहां सोमवार का दिन शिव जी की उपासना के लिए समर्पित होता है, वहीं मंगलवार का दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप को समर्पित है. इस साल सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026 मंगलवार को रखा जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से शादीशुदा महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है, वहीं कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं. आइए जानते हैं सावन 2026 के पहले मंगला गौरी व्रत के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस महीने पड़ने वाले सभी मंगला गौरी व्रतों की तिथियों के बारे में.

कब रखा जाएगा पहला मंगला गौरी व्रत?

सावन के महीने में आने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, मंगलवार को होगा. इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और पूरे दिन माता गौरी की पूजा-अर्चना करती हैं. मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत रखने से माता पार्वती खुश होती हैं और अपने भक्तों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं. यही वजह है कि सावन के मंगलवार को महिलाओं के बीच इस व्रत का खास महत्व माना जाता है.

मंगला गौरी व्रत 2026 में किस- किस दिन

सावन 2026 में कुल चार मंगलवार पड़ रहे हैं और इन सभी दिनों में मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा.

  • पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त 2026, मंगलवार
  • दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त 2026, मंगलवार
  • तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त 2026, मंगलवार
  • चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त 2026, मंगलवार
मंगला गौरी व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त

4 अगस्त को मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक रहेगा. वहीं, पूजा के लिए एक और सही समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक रहेगा. इस दौरान श्रद्धालु माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं.

सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना जाता है यह व्रत

मंगला गौरी व्रत को खास तौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है.कई महिलाएं इस दिन माता गौरी को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं. इसमें सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, कुमकुम और चुनरी जैसी चीजें शामिल होती हैं. मान्यता है कि माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से माता पार्वती को वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य की देवी के रूप में भी पूजा जाता है. सावन के मंगलवार को मंगला गौरी की पूजा करने की परंपरा इसी आस्था से जुड़ी मानी जाती है. मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धा और नियम के साथ मंगला गौरी व्रत करती हैं, उन्हें माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है. इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और परिवार में खुशहाली बनी रहने की कामना की जाती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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