'हिंदुस्तान टाइम्स' के विशेष क्रिकेट विश्लेषण के अनुसार, जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20I सीरीज में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करके लाइमलाइट में आए 15 वर्षीय वामहस्त बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अब अपने करियर के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। क्रिकेट जानकारों का मानना है कि सफेद गेंद के छोटे प्रारूप में सफलता हासिल करने के बाद, अब सूर्यवंशी को प्रथम श्रेणी क्रिकेट और लाल गेंद के प्रारूप (Red-Ball Cricket) में खुद को साबित करना होगा, जिसे भारतीय क्रिकेट में सबसे कठिन ऑडिशन माना जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि टी20 क्रिकेट का आक्रामक अंदाज दर्शकों को खूब लुभाता है, लेकिन किसी भी युवा बल्लेबाज की असली तकनीक, स्विंग होती गेंदों को छोड़ने का हुनर और क्रीज पर घंटों टिकने का धैर्य लंबे प्रारूप के मैचों में ही परखा जाता है। चयनकर्ताओं और भारतीय टीम प्रबंधन की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सूर्यवंशी लाल गेंद के सामने अपनी बल्लेबाजी शैली में कैसे सामंजस्य बिठाते हैं।
बीसीसीआई के कोचों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूर्यवंशी लंबे स्पेल में स्विंग और सीम गेंदबाजी का सामना करते हुए अपनी निरंतरता बनाए रखते हैं, तो वे भारत के लिए केवल सीमित ओवरों के ही नहीं, बल्कि भविष्य में सभी प्रारूपों के एक बेहतरीन ऑल-फॉर्मेट खिलाड़ी के रूप में उभर सकते हैं।