कांग्रेस ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों के खिलाफ आरोपों की सीबीआई जांच में राज्य सरकार द्वारा सहयोग नहीं किए जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य के मुख्य सचिव को तलब किया जाना गंभीर मामला है.
मुख्य विपक्षी दल ने यह आरोप भी लगाया कि पेमा खांडू का अब भी मुख्यमंत्री पद पर बने रहना सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और ईमानदारी के प्रति प्रधानमंत्री की फर्जी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
नहीं कर रहे सहयोग
सीबीआई ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री के परिजनों के स्वामित्व वाली या उनसे संबंधित बताई जा रही कंपनियों को सार्वजनिक निर्माण कार्यों के ठेकों के कथित पक्षपातपूर्ण आवंटन के आरोपों की प्रारंभिक जांच के दौरान अरुणाचल प्रदेश सरकार अभिलेख उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं कर रही है.
सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अरुणाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा.
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, यह तो होना ही था. 6 अप्रैल, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के उन ठेकों की सीबीआई जांच का आदेश दिया था जो पीडब्ल्यूडी मंत्री ने अपने परिवार के सदस्यों को दिए गए थे.'
उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, 'अरुणाचल प्रदेश में पीडब्ल्यूडी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री हैं. उनका अब भी पद पर बने रहना सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और ईमानदारी के प्रति प्रधानमंत्री की फर्जी प्रतिबद्धता को उजागर करता है.'
ये है मामला
गौरतलब है कि छह अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को दो हफ्ते के भीतर प्रारंभिक जांच दर्ज करने का निर्देश दिया था. यह जांच अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण कार्यों के ठेकों को मुख्यमंत्री खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली या उनसे संबंधित बताई जा रही कंपनियों को कथित रूप से पक्षपातपूर्ण ढंग से दिए जाने के आरोपों से संबंधित है.
इनपुट-भाषा
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