Causes Of Lungs Cancer: अक्सर खांसी होने पर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं. ज्यादातर खांसी हमारे लिए हानिकारक नहीं होती और कुछ दिनों या हफ्तें भर में ठिक भी हो जाती है. लेकिन तब क्या करें, जब कई दिनों तक खांसी ठिक ही न हो. ऐसे में क्या यह किसी खतरनाक बीमारी का संकेत हो कसता है. इस पर मैक्स स्मार्ट हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी और ट्रांसप्लांट फिजिशियन निदेशक डॉ. अपार जिंदल ने फेफड़ों के कैंसर के कुछ संभावित लक्षणों के बारे में बताया.
इस पर डॉ. अपार जिंदल का कहना है कि फैफड़ो का कैंसर धीरे-धीरे शुरू होता है. शुरुआती दिनों में फेफड़ों के कैंसर का कोई लक्षण नहीं दिखता. कभी-कभी सिर्फ हल्की खांसी होती है, जिसे लोग आम इन्फेक्शन, स्मोकिंग का असर या एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता हैं. यही वजह है कि ज्यादातर मरीजों में इस बीमारी का पता तब चलता है, जब यह बहुत ज्यादा बढ़ चुकी होती है. डॉ. जिंदल के मुताबिक, अगर खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा पुरानी हो, खांसी का तरीका बदल गया हो या बलगम में खून आ रहा हो, तो इसे हल्के में न लें. यह टीबी, फेफड़ों के कैंसर या फेफड़ों की अन्य गंभीर बीमारियों जैसे ILD का इशारा हो सकता है.
डॉ. अपार जिंदल के अनुसार, कुछ और भी चेतावनी भरे लक्षण हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है. जैसे—सांस का ज्यादा फूलना, सीने में दर्द, बार-बार फेफड़ों में इन्फेक्शन होना, सांस लेते समय घरघराहट जैसी आवाज आना, बिना वजह वजन घटना,भूख न लगना, हर वक्त थकान रहना या आवाज बैठ जाना. हालांकि, ये लक्षण होने का मतलब हमेशा फेफड़ों का कैंसर नहीं होता, लेकिन फिर भी डॉक्टर से इसकी पूरी जांच करवाना बहुत जरूरी है.
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ सिगरेट याा बीड़ी पीने वालों को ही होता है, लेकिन ऐसा नहीं है. हां तंबाकू इसका सबसे बड़ा कारण है, पर ऐसे कई मरीज हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया. इस बीमारी की मुख्य वजह दूसरों के सिगरेट का धुआं, हवा में फैला प्रदूषण, फैक्ट्रियों की धूल और केमिकल, जहरीली गैसें या परिवार में पहले किसी को कैंसर होना यानी आनुवंशिक कारण को माना जाता है.
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डॉ. अपार जिंदल ने बताया कि नई तकनीकों से अब फेफड़ों के कैंसर का पता बहुत जल्दी चल जाता है. इसके लिए डॉक्टर मरीज की हिस्ट्री देखने के बाद चेस्ट एक्स-रे और सीटी स्कैन करते हैं. अगर कुछ गड़बड़ी दिखे, तो ब्रोंकोस्कोपी या बायोप्सी जैसी जांच से बीमारी की पुष्टी कि जाती है. अब तो जेनेटिक जांच भी होती है, जिससे हर मरीज के हिसाब से खास इलाज तय किया जाता है. अब तो कैंसर का इलाज भी अब बहुत एडवांस हो गया है. बीमारी के स्टेज के हिसाब से अब बिना बड़े चीर-फाड़ की सर्जरी, एडवांस रेडिएशन, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी से इलाज होता है. अगर बीमारी का पता शुरुआती दौर में चल जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है.
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