लोकसभा में चुपचाप पास हुआ टैक्सेशन बिल 2026, UPI, RuPay और डेटा सेंटर को बड़ा फायदा
सौरव कुमार August 07, 2026 09:42 AM

लोकसभा ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को टैक्सेशन और दूसरे कानून (अमेंडमेंट) बिल को बिना किसी चर्चा के पास कर दिया. विपक्षी सांसद कई मुद्दों को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही बाधित रही. बिल पास होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई. इस बिल के जरिए पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 में भी बदलाव किए गए हैं.

सरकार का कहना है कि इस बिल का मकसद भारत में ज्यादा विदेशी निवेश लाना, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारत के डेटा सेंटर का इस्तेमाल आसान बनाना है. इसके जरिए कारोबार से जुड़े नियमों में स्पष्टता लाने की भी कोशिश की गई है. इस बिल में पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम एक्ट को इनकम टैक्स एक्ट से अलग करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत सरकार भविष्य में UPI और RuPay कार्ड से होने वाले भुगतान पर लागू मौजूदा जीरो  मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) व्यवस्था में बदलाव कर सकेगी. 

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नए कानून के तहत क्या फायदा होगा?

फिलहाल बैंकों और पेमेंट सिस्टम से जुड़ी कंपनियों को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहकों से सीधे या किसी अन्य तरीके से कोई अतिरिक्त शुल्क लेने की अनुमति नहीं है. प्रस्तावित बदलावों के बाद केंद्र सरकार नोटिफिकेशन जारी करके यह तय कर सकेगी कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम या कौन से लेनदेन बिना किसी शुल्क के जारी रहेंगे. यह बिल 5 जून 2026 को जारी उस अध्यादेश की जगह लेगा, जिसमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स से छूट दी गई थी. नए कानून के तहत फंड मैनेजर्स के लिए भारत में अपना कारोबार स्थापित करना भी आसान बनाया जाएगा. इसके लिए उन शर्तों की संख्या कम की जाएगी, जिनकी वजह से विदेशी फंड की वैश्विक आय भारत में टैक्स के दायरे में आ सकती थी. 

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने का काम

घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बिल में एक और बड़ा प्रावधान किया गया है. इसके तहत उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली इनकम टैक्स छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ा दिया जाएगा, जो भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के जरिए इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद तैयार कराती हैं. बिल में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनसे जुड़े जरूरी पार्ट्स और एक्सेसरीज़ समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को शामिल किया गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए उन विदेशी कंपनियों को भी 15 साल तक इनकम टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव है, जो वित्त वर्ष 2040-41 तक भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने से पहले इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में स्टोर करेंगी.

भारत सरकार क्या चाहती है?

बिल में विदेशी क्लाउड सर्विस देने वाली कंपनियों के लिए भी नियम आसान बनाने का प्रस्ताव है. इसके तहत भारत में मौजूद डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने के लिए कई मौजूदा मंजूरियों और नोटिफिकेशन की जरूरत खत्म की जाएगी. साथ ही इन कंपनियों को डेटा सेंटर का मालिक होने की अनिवार्यता भी नहीं रहेगी. वे लीज पर लिए गए इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके भी अपना काम कर सकेंगी. वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस कानून में किए गए सभी बदलावों का एक ही मकसद है. सरकार चाहती है कि भारत विदेशी निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक कारोबार के लिए पहले से ज्यादा भरोसेमंद और आकर्षक देश बने.

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