प्रेग्नेंसी की जर्नी हर किसी के लिए अलग- अलग होती है. हमेशा इस बात पर सवाल उठाया जाता है कि क्या प्रेग्नेंसी के बाद एक लड़की का करियर खत्म हो जाता है. ऐसा होता तो नहीं है लेकिन कई बार ऑफिस में ही मैटरनिटी लीव या प्रेग्नेंसी को काफी बड़ी बात बना दिया जाता है, जिसके आधार पर महिलाओं का डिमोशन तक कर दिया जाता है. ऐसे ही एक मामले में हाल ही में हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल राखी बिष्ट नाम की महिला एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. उन्होंने जून 2022 में कंपनी में अकाउंटिंग मैनेजर के तौर पर नौकरी शुरू की थी. उस समय उनकी सैलरी करीब 2.6 लाख रुपये प्रतिमाह थी. दिसंबर 2023 में उन्होंने मैटरनिटी लीव ली. छुट्टी के बाद जब वो काम पर लौटीं तो उन्हें कंपनी के ट्रेजरी विभाग में भेज दिया गया. जिस पर राखी ने आपत्ति दर्ज की क्योंकि उन्हें जो काम दिया गया, वो उनकी पुरानी पोस्ट से काफी निचले स्तर का था. ये काम आमतौर पर स्टाफ अकाउंटेंट करते थे.
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नौकरी छोड़ने पर मजबूर हुईं राखी
इसके बाद राखी ने अक्टूबर 2024 में नौकरी छोड़ दी और दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कंपनी से 50 लाख रुपये मुआवजा और निजी कंपनियों में महिलाओं के साथ भेदभाव रोकने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की.
हाईकोर्ट ने दिलवाया मुआवजा
जिसके बाद इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में हुई और 31 अगस्त को कोर्ट ने कंपनी को राखी को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. कोर्ट ने ये भी कहा कि गर्भावस्था या मैटरनिटी लीव किसी महिला को नौकरी में नुकसान पहुंचाने, पद घटाने या करियर की तरक्की रोकने की वजह नहीं बन सकती. जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि किसी भी स्थिति में मातृत्व को कार्यस्थल पर महिला के लिए शर्मिंदगी या नुकसान का कारण नहीं बनाया जा सकता.
मैटरनिटी लीव के बाद क्या होना चाहिए?
वहीं हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि मैटरनिटी लीव से लौटने वाली महिला को आमतौर पर उसी पद पर वापस रखा जाना चाहिए, जिस पर वो छुट्टी पर जाने से पहले काम कर रही थी. अगर किसी वास्तविक संगठनात्मक कारण से वो पद उपलब्ध नहीं है, तो महिला को उसके बराबर का पद दिया जाना चाहिए. इसमें सैलरी, पद, जिम्मेदारी, अधिकार और प्रमोशन की संभावनाएं लगभग समान होनी चाहिए.
इसके अलावा कंपनी को ये भी बताना होगा कि पुराना पद क्यों उपलब्ध नहीं है और नए पद की सैलरी, जिम्मेदारियां और रिपोर्टिंग जैसी पूरी जानकारी देनी होगी. अगर महिला नए पद पर आपत्ति जताती है, तो कंपनी को उसकी बात पर विचार करके कारण सहित जवाब देना होगा.