भारत क्यों खरीद रहा मास्को से तेल, रूसी राजदूत ने दोटूक बताया
आशुतोष प्रताप सिंह September 06, 2026 08:42 PM

भारत रूस से कच्चा तेल अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय विकास के लिए खरीद रहा है, न कि रूस की मदद करने के लिए. भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने हाल ही में डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में यह बात कही. उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर रूस से तेल खरीद रहा है. इसका मकसद रूस की सहायता करना नहीं है.

‘भारत अपने राष्ट्रीय विकास के लिए खरीद रहा तेल’

डीडी न्यूज से बातचीत में डेनिस अलीपोव ने कहा, “भारत रूस का तेल रूस की मदद करने के लिए नहीं खरीदता. वह अपने लिए और अपने राष्ट्रीय विकास के लिए तेल खरीद रहा है.”

अलीपोव ने शुक्रवार को भी कहा था कि मॉस्को भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों की ओर से लगाए जा रहे द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) की आलोचना की थी.

2022 के बाद रूस से भारत की तेल खरीद बढ़ी

रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद 2022 के बाद तेजी से बढ़ी. इसकी बड़ी वजह जी-7 और यूरोपीय संघ की ओर से रूस की ऊर्जा बिक्री पर लगाए गए मूल्य सीमा (Price Cap) और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध रहे. यूरोपीय बाजार में रूसी तेल की मांग और खरीद पर असर पड़ने के बाद भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल हो गया. भारत फिलहाल रूस के कच्चे तेल का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है.

रूसी तेल खरीद पर अमेरिका लगा चुका है टैरिफ

रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका पहले भी भारत के सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है. पिछले साल भारत से आने वाले सामान पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया था. हालांकि, इस साल फरवरी में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापार समझौते को लेकर अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमति बनने के बाद यह शुल्क हटा लिया गया था.

इसके बावजूद रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से टैरिफ का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

अमेरिकी सीनेट में 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेट में एक विधेयक पेश किया गया है, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से आने वाले सभी सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है. भारत फिलहाल रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है.

अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो भारत के सामान पर भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल यह सिर्फ प्रस्तावित विधेयक है.

‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जानता है’

रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने एएनआई से बातचीत में कहा कि भारत पहले भी यह दिखा चुका है कि वह अपने रुख पर मजबूती से कायम रह सकता है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकता है.

उन्होंने कहा कि मॉस्को भारत की जरूरत के मुताबिक उसे “जितना तेल चाहिए, उतना” उपलब्ध कराने के लिए तैयार है.

पश्चिमी प्रतिबंधों को बताया ‘दबाव बनाने की रणनीति’

अलीपोव ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और टैरिफ की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि इन देशों ने ईमानदार सहयोग के बजाय दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है. एएनआई के मुताबिक, अलीपोव ने कहा, “दुर्भाग्य से, जो लोग प्रतिबंध और टैरिफ लगाते हैं, उन्होंने ईमानदार सहयोग के बजाय दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है. इससे वे देश भारत को तेल के मामले में हमसे बेहतर सौदा देने की स्थिति में नहीं आ पाते.”

रूसी राजदूत के मुताबिक, रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है और तेल की आपूर्ति को लेकर मॉस्को का रुख स्पष्ट है.

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