महाराष्ट्र में डॉक्टरों के साथ मारपीट की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने कहा है कि डॉक्टरों को उनके चैंबर में घुसकर पीटना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता. ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है. इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकेगी.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अगर राजनीतिक कार्यकर्ता डॉक्टरों पर हमला करते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए. उन्हें खुलेआम घूमने की अनुमति नहीं मिल सकती. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से समाज में स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है.
शिवसेना पार्षद ने की थी मारपीट
मामला कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) की तरफ से चलाए जा रहे शास्त्री नगर हॉस्पिटल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट का है. शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे पर घटना का आरोप है. निचली अदालत ने 14 जुलाई को रमेश म्हात्रे को ज़मानत दी थी. बॉम्बे हाई कोर्ट ने 18 जुलाई को स्वतः संज्ञान लेते हुए रोक लगा दी. इसके बाद आरोपी को आत्मसमर्पण करना पड़ा.
आखिरकार 7 अगस्त को हाई कोर्ट ने म्हात्रे को कड़ी शर्तों के साथ ज़मानत दी. इन शर्तों के मुताबिक, चार्जशीट दाखिल होने तक उन्हें महाराष्ट्र से बाहर रहना होगा और डॉक्टरों से दूरी बनाए रखनी होगी. हाई कोर्ट ने मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई का भी आदेश दिया.
म्हात्रे ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी याचिका
म्हात्रे ने जमानत की शर्तों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सुनवाई के दौरान उनके वकील मुकुल रोहतगी ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द कराने के लिए याचिका दाखिल की है. इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी कर दिया.
सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि पालघर में भी डॉक्टरों पर हमले की ऐसी ही एक घटना हुई है. राज्य में बार-बार हो रही ऐसी हिंसक घटनाओं को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है. ऐसा आदेश देना ज़रूरी है जो एक सबक बने. कोर्ट ने म्हात्रे को राज्य सरकार की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा. मामले पर सुनवाई 28 सितंबर को होगी.