क्या 2029 तक नशामुक्त होगा भारत? 10.3% स्कूली बच्चों समेत कितने फंसे
ज़ाहिद अहमद September 07, 2026 07:42 PM

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान करते हुए कहा, 'हम 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाएंगे.' 6 सितंबर 2026 को उन्होंने इसे 'देश की सबसे बड़ी लड़ाई' बताते हुए कहा, 'नक्सलवाद खत्म करने के बाद अब ड्रग्स के खिलाफ यह सबसे बड़ी राष्ट्रीय मुहिम होगी.' शाह ने जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन साल का रोडमैप पेश किया और कहा कि 2026-29 का दौर 'मिशन मोड' में चलेगा. हर टारगेट के लिए टाइमलाइन, जिम्मेदार मंत्रालय, मापने लायक नतीजे और क्वार्टरली रिव्यू होगा. लेकिन असली सवाल है कि क्या 2029 तक भारत को नशामुक्त करना मुमकिन है...

भारत में नशे की समस्या कितनी बड़ी है?

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) की डीन डॉ. राज गजभिए के मुताबिक, भारत में करीब 25 करोड़ लोग नशा करते हैं, जबकि ऑफिशियल रिकॉर्ड में यह आंकड़ा सिर्फ 10 करोड़ है. डॉ. गजभिए ने इसे 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' बताते हुए कहा कि 4 करोड़ से ज्यादा लोग नशे के सहारे ही जी रहे हैं. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के डेटा के मुताबिक:

  • कैनबिस (गांजा/चरस): 3.1 करोड़ लोग यानी 2.8% आबादी आदि है.
  • ओपिओइड (अफीम/हेरोइन): 2.26 करोड़ यानी लगभग 2.1% आबादी इस्तेमाल करती है.
  • जिंदगी के लिए इलाज: 60 लाख लोगों को ओपिओइड की लत के लिए इलाज की जरूरत है.

नशे के संपर्क में 10% स्कूली बच्चे

AIIMS के नेतृत्व में हुए एक सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. इस सर्वे के मुताबिक, 10.3% स्कूली किशोरों ने पिछले एक साल में साइकोएक्टिव पदार्थों का इस्तेमाल किया. 15.1% ने कभी न कभी कोई न कोई पदार्थ ट्राई किया था. 7.2% ने पिछले एक महीने में इस्तेमाल की बात मानी. यानी हर दसवां स्कूली बच्चा किसी न किसी नशे के संपर्क में है.

हर साल 9 लाख से ज्यादा मौतें

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की 'भारत में नशीले पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण' रिपोर्ट के आधार के मुताबिक, नशे से जुड़ी मौतों का आंकड़ा सालाना 9 लाख के पार जा सकता है. भारत में हर एक लाख लोगों पर शराब से जुड़ी मौतों की संख्या 38.5 है. नशा सिर्फ एक सामाजिक समस्या नहीं है. यह अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा संकट है.

  • इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ड्रग पॉलिसी की स्टडी के मुताबिक, समय से पहले होने वाली मौतों और दुर्घटनाओं की वजह से भारत को हर साल GDP का लगभग 1.45% नुकसान होता है.
  • नशे से GDP को 2.5% से ज्यादा का नुकसान हो रहा है, जो सालाना करीब 1.60 लाख करोड़ रुपए के बराबर है.
  • पंजाब अकेले ही हर साल अपनी ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) का 2.2% नशे की वजह से गंवा रहा है. इसमें हेल्थकेयर, कानून व्यवस्था,
  • रिहैबिलिटेशन के साथ-साथ अनुपस्थिति, कम उत्पादकता और समय से पहले मौतों का नुकसान शामिल है.

एक अनुमान के मुताबिक देश में नशे का कारोबार 20 लाख करोड़ रुपए सालाना है.

आखिर भारत में ड्रग्स कहां से आ रहा है?

अमित शाह ने खुद माना कि भारत की भौगोलिक स्थिति इसे ड्रग्स तस्करी के लिए बेहद असुरक्षित बनाती है.

भारत दो बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रूट 'डेथ ट्राएंगल' (म्यांमार, थाईलैंड, लाओस) और 'डेथ क्रेसेंट' (अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान) के बीच स्थित है. इन्हीं रास्तों से हेरोइन, मेथामफेटामाइन और अन्य नशीले पदार्थ भारत में आते हैं. NCB की 2025 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक:

  • पंजाब अकेले देश की कुल हेरोइन जब्ती का 58% (2,086 किलोग्राम) अकेले अपने राज्य में करता है.
  • 2025 में 305 ड्रोन-आधारित ड्रग्स तस्करी के मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 298 पंजाब में थे. यानी पंजाब में ड्रोन के जरिए ड्रग्स पहुंचाने के 97% से ज्यादा मामले दर्ज हुए.
  • 305 ड्रोन घटनाएं हुईं, जो 2021 के मुकाबले 100 गुना की बढ़ोतरी है.

सबसे खतरनाक ट्रेंड यह है कि अब नशा सिर्फ अफगानिस्तान या म्यांमार से आने वाली हेरोइन तक सीमित नहीं है. भारत में बनी कोडीन-आधारित कफ सिरप, ट्रामाडोल, ब्यूप्रेनोर्फिन, अल्प्राजोलम जैसी फार्मास्युटिकल दवाएं अब नशे का बड़ा जरिया बन रही हैं. NCB रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 2025 में फार्मास्युटिकल दवाएं NCB जब्त की गई कुल दवाओं का 75% थीं.
  • सभी ड्रग लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों (DLEAs) ने 2025 में 2,37,390 किलोग्राम फार्मास्युटिकल दवाएं जब्त कीं. यह 2021 से 77% की बढ़ोतरी है.
  • पंजाब में अकेले 2025 में 8,95,508 बोतल कोडीन-आधारित कफ सिरप जब्त हुई, यानी  एक साल में लगभग 9 लाख बोतल.


NCB ने इसे 'डीसेंट्रलाइज्ड सप्लाई मैकेनिज्म' की ओर बदलाव बताया, यानी तस्कर अब छोटे-छोटे कंसाइनमेंट में ड्रग्स भेज रहे हैं. इससे बड़ी जब्ती तो कम हुई है लेकिन मामले और गिरफ्तारियां बढ़ी हैं. 2025 में कुल 1,48,063 मामले दर्ज हुए, जो 2024 में 96,930 थे. 1,83,675 लोग गिरफ्तार हुए, जबकि 2024 में 1,22,224 थे. यानी गिरफ्तारियों में 89% की बढ़ोतरी हुई, जिनमें इनमें 747 विदेशी नागरिक भी शामिल थे.


तो क्या 2029 तक भारत नशामुक्त हो जाएगा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत को नशामुक्त करने के लिए सरकार के सामने 4 बड़ी चुनौतियां हैं:

  • फार्मास्युटिकल ड्रग्स का बढ़ता संकट: भारत 'दुनिया की फार्मेसी' है, लेकिन यही ताकत सबसे बड़ी कमजोरी भी बन रही है. नुस्खे वाली दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं, केमिस्ट की दुकानों पर सख्त कंट्रोल नहीं है और ड्रग इंस्पेक्टर्स की संख्या कम है. NCB ने खुद माना कि फार्मास्युटिकल ड्रग्स का गलत इस्तेमाल 'बढ़ती चुनौती' है.
  • डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और ड्रोन: तस्कर अब नए-नए तरीके अपना रहे हैं. डार्कनेट पर ऑर्डर, क्रिप्टोकरेंसी से पेमेंट, ड्रोन से ड्रॉप्स और समुद्री रास्तों से मछली पकड़ने वाली नावों के जरिए तस्करी कर रहे हैं. NCB ने 2021-25 के बीच 110 डार्कनेट से जुड़े मामले दर्ज किए हैं और माना कि 'पारंपरिक जांच पद्धतियां अक्सर कम पड़ जाती हैं.'
  • जेलों के अंदर तस्करी: NCB ने जेल-आधारित ड्रग्स तस्करी को एक बड़ी चिंता बताया है. जेलों के अंदर से ही नेटवर्क चल रहे हैं और बाहर ड्रग्स सप्लाई हो रही है.
  • एजेंसियों पर बढ़ता बोझ: 2025 में अकेले 1.48 लाख मामले दर्ज हुए. इतने मामलों को निपटाना, सजा दिलाना और नए मामलों को रोकना एजेंसियों की क्षमता पर सवाल खड़ा करता है.
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