क्रिकेट न्यूज़ डेस्क ।। सचिन तेंदुलकर ने 1989 में भारत के लिए पदार्पण किया। 1994 में सचिन ने वनडे में ओपनिंग करना शुरू किया और एक के बाद एक रिकॉर्ड बनाए। इस बल्लेबाज ने 1989 में पाकिस्तान के लिए भी पदार्पण किया था। 90 के दशक में सचिन तेंदुलकर और इस बल्लेबाज के बीच खूब तुलना हुई। उसका नाम सईद अनवर था। 1997 तक सचिन ने एकदिवसीय मैचों में 12 शतक बनाये थे जबकि सईद अनवर ने 14 शतक बनाये थे। अनवर का औसत भी सचिन से बेहतर था। अनवर ने 194 रन की सर्वोच्च एकदिवसीय पारी का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। अनवर की तुलना ब्रायन लारा से भी की गई।
वह 2003 में सेवानिवृत्त हुए।
सईद अनवर ने 2003 विश्व कप में भारत के खिलाफ शतक बनाया था। इसके बाद भी उनकी टीम हार गई। टूर्नामेंट के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद अनवर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अनवर ने एकदिवसीय मैचों में 39 की औसत से 8824 रन बनाए। आज भी उनकी गिनती सर्वश्रेष्ठ वनडे सलामी बल्लेबाजों में होती है। उनके नाम 20 शतक भी हैं। उन्होंने भारत के खिलाफ एकदिवसीय मैचों में 2002 रन बनाए हैं। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सईद अनवर मौलाना बन गए।
सईद अनवर मौलाना बन गए
क्रिकेट से संन्यास लेने से पहले भी सईद अनवर का झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर था। यह सब 2001 में उनकी बेटी की मृत्यु के बाद शुरू हुआ। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अनवर मौलाना बन गए। वह तब्लीगी जमात में शामिल हो गए और इस्लाम का प्रचार करने लगे। अधिकांश क्रिकेटर संन्यास के बाद कोचिंग या कमेंट्री का काम करते हैं लेकिन अनवर ने अलग रास्ता चुना। पाकिस्तान के लिए वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड अभी भी उनके नाम है, लेकिन इसका क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं है।
मुहम्मद यूसुफ के धर्म परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका
पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहम्मद यूसुफ का मूल नाम यूसुफ योहाना था। वह ईसाई धर्म का पालन करता था। उन्होंने 2004 में अपना धर्म बदल लिया। सईद अनवर ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूसुफ ने खुद भी इसका खुलासा किया था। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "सईद भाई ने मुझसे कलमा पढ़वाया।" इसके बाद मैंने मौलवी फहीम साहब से मुलाकात तय की।