आरबीआई के नए एफडी नियमों के अनुसार, निवेशकों को अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिलेगी। अब कोई भी व्यक्ति अनलिमिटेड एफडी अकाउंट खोल सकता है, लेकिन इसके लिए पैन कार्ड और केवाईसी अनिवार्य होगा। वर्तमान में एफडी पर ब्याज दर 7% से 8.5% तक मिल रही है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह और भी फायदेमंद हो सकता है। निवेश करने से पहले सभी जरूरी नियमों को समझना अनिवार्य है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकिंग सेक्टर को और अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए समय-समय पर नए नियम लागू किए जाते हैं। इसी कड़ी में फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit – FD) के नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे निवेशकों को अपने पैसे के सुरक्षित निवेश में अधिक स्पष्टता मिले। अगर आप किसी भी बैंक में एफडी करने की योजना बना रहे हैं, तो नए नियमों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।
फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश की पहली पसंद क्यों?भारत में ज्यादातर निवेशक ऐसे होते हैं, जो अपने पैसे को सुरक्षित रखना चाहते हैं और जोखिम नहीं उठाना चाहते। फिक्स्ड डिपॉजिट इस लिहाज से सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों में से एक है। यह गारंटीड रिटर्न प्रदान करता है और मार्केट की अस्थिरता का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन निवेश से पहले एफडी के नए नियमों को समझना बहुत जरूरी है।
कितने FD अकाउंट खोले जा सकते हैं?RBI के नियमों के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक जो 18 वर्ष या उससे अधिक का है, वह अपनी आय के अनुसार किसी भी सरकारी या प्राइवेट बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट (FD Account) खुलवा सकता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति के लिए एफडी अकाउंट खोलने की कोई लिमिट तय नहीं की गई है। यानी आप कितने भी एफडी अकाउंट ओपन कर सकते हैं, बशर्ते आपके दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी हो। हालांकि, प्रत्येक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर कर नियम लागू होते हैं, जिन्हें निवेशकों को समझना चाहिए।
एफडी अकाउंट खोलने के लिए जरूरी दस्तावेजअगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट खोलना चाहते हैं, तो आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि 3 महीने से लेकर 10 साल तक हो सकती है। आप अपनी वित्तीय योजना और जरूरतों के अनुसार अलग-अलग अवधि के लिए एफडी कर सकते हैं।
वर्तमान ब्याज दरेंबाजार में कई बैंक एफडी पर आकर्षक ब्याज दरें प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में यह दरें 7% से 8.5% तक हो सकती हैं। हालांकि, यह बैंक और एफडी की अवधि के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर सामान्य निवेशकों की तुलना में अधिक ब्याज दर दी जाती है।