प्रॉपर्टी कब्जा छुड़ाने के लिए कानूनी उपाय
newzfatafat March 29, 2025 10:42 PM
प्रॉपर्टी पर अधिकार और कब्जा छुड़ाने के नियम


प्रॉपर्टी कब्जा छुड़ाने के उपाय: कानून के तहत प्रॉपर्टी पर अधिकारों के साथ-साथ कब्जा छुड़ाने के नियम भी मौजूद हैं। किसी भी प्रॉपर्टी मालिक को अपनी संपत्ति को बिना किसी विवाद के वापस पाने का अधिकार है।


यदि प्रॉपर्टी मालिक कुछ विशेष कदम उठाते हैं, तो वे आसानी से संपत्ति विवाद से निपट सकते हैं। कब्जा हटाना सरल है (How to remove illegal possession)। इसके अलावा, प्रशासन आपकी सहायता करेगा, जिससे आप कोर्ट के चक्कर से बच सकते हैं। आइए जानते हैं कि आपको क्या करना होगा।


कानूनी सहायता का उपयोग करें

कानून की मदद लें:


यदि कोई आपकी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लेता है, तो पीड़ित व्यक्ति सिविल और आपराधिक दोनों प्रकार के मुकदमे दायर कर सकता है। प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जा हटाने के लिए कानूनों का सहारा लिया जा सकता है; इसके लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक है। कब्जा छुड़ाने के चार कानूनी सिद्धांतों को जानना भी महत्वपूर्ण है। इसके बाद, आप कोर्ट में कब्जाधारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।


धारा 420 का प्रावधान

धारा 420:


इस धारा के तहत केस तब दर्ज किए जा सकते हैं जब किसी व्यक्ति को जमीनी मामले में धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया हो या बल प्रयोग से उसकी संपत्ति से हटाया गया हो। प्रॉपर्टी मालिक को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पहला कदम उठाना चाहिए।


आईपीसी की धारा 406

धारा 406:


इस धारा का उपयोग तब करें जब कोई व्यक्ति विश्वास के साथ संपत्ति या उसके दस्तावेजों को चुरा लेता है। प्रॉपर्टी मालिक इस मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज करवा सकता है, क्योंकि यह गंभीर अपराध माना जाता है।


धारा 467 का प्रावधान

धारा 467:


यह धारा तब लागू होती है जब संपत्ति को हथियाने या फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला होता है। इसमें साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज बनाकर किसी की संपत्ति पर कब्जा करने का मामला दर्ज किया गया है।


स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट के तहत सहायता

स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट:


यह सिविल कानून के अंतर्गत आता है। जब कोई व्यक्ति किसी की संपत्ति पर जबरदस्ती कब्जा करता है, तो इस कानून की मदद ली जा सकती है। पीड़ित को स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट की धारा 6 के तहत त्वरित न्याय मिल सकता है। इस कानून के अनुसार, कब्जा करने के छह महीने के भीतर मुकदमा दायर करना आवश्यक है। हालांकि, इस कानून के तहत सरकार के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।


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