हकलाना या तोतलाना वह स्थिति है जब व्यक्ति शब्दों को सही तरीके से नहीं बोल पाता, जैसे कि बोलते समय रुकना या बार-बार दोहराना। यह समस्या तब होती है जब व्यक्ति कुछ विशेष ध्वनियों, जैसे प, ब, ट, ड, ग, क, को ठीक से नहीं बोल पाता। कभी-कभी, मोटी जीभ भी इस समस्या का कारण बन सकती है।
बोलने में सहायक मांसपेशियों के स्नायुओं का सही नियंत्रण न होने से हकलाने की समस्या उत्पन्न होती है। इसके अलावा, जीभ का मोटा होना भी इस स्थिति को बढ़ा सकता है।
एक्यूप्रेशर तकनीक का उपयोग करके हकलाने की समस्या को कम किया जा सकता है। रोगी को चित्र में दिखाए गए बिंदुओं पर 10-15 सेकंड के लिए दबाव डालना चाहिए। यह प्रक्रिया रोजाना 15-30 मिनट तक दोहराई जानी चाहिए। एक अनुभवी एक्यूप्रेशर चिकित्सक से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
नोट: दबाव सहनीय होना चाहिए, अत्यधिक असहनीय नहीं।
घी: 3 से 6 ग्राम घी में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
बादाम: 10-12 बादाम को भिगोकर छिलका उतारें और मक्खन के साथ मिलाकर खाएं।
दूध: 10 ग्राम दूध और 250 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।
दूधी: 2 ग्राम दूधी की जड़ को चूसने से लाभ होता है।
मीठी बच: मीठी बच, अस्वगन्ध और छोटी पीपल का चूर्ण बनाकर शहद के साथ लें।
गोरखमुण्डी: गोरखमुण्डी, ब्रह्मी और भुनी सौंठ का चूर्ण बनाकर सेवन करें।
दालचीनी: दालचीनी चबाने से हकलाना कम होता है।
धनिया: अमलतास और हरे धनिया का मिश्रण कुल्ला करने से लाभ होता है।
सत्यानाशी: सत्यानाशी का दूध जीभ पर मलने से हकलाना ठीक होता है।
अकरकरा: अकरकरा और तेजपात का चूर्ण जीभ पर लगाने से लाभ होता है।
सौंफ: सौंफ का पानी पीने से हकलाना ठीक होता है।
छुहारा: छुहारे को दूध में उबालकर सेवन करें।
कलौंजी: कलौंजी के तेल को जीभ पर लगाने से लाभ होता है।
इलायची: इलायची का चूर्ण और कस्तूरी का मिश्रण लाभकारी है।
वच: ताजी वच का टुकड़ा चूसने से हकलाना कम होता है।
पीपल: पीपल के फलों का चूर्ण सेवन करें।
तेजपत्ता: तेजपत्ता चूसने से हकलाना दूर होता है।
कालीमिर्च: कालीमिर्च और बादाम का चटनी बनाकर सेवन करें।
आंवला: आंवला चबाने से जीभ पतली होती है।
मक्खन: मक्खन में चीनी मिलाकर सेवन करें।
फिटकरी: फिटकरी का प्रयोग तुतलाने में लाभकारी होता है।