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अब केंद्र सरकार देशभर में न्यूनतम वेतन बढ़ाने जा रही है। क्या अब सभी संस्थानों, चाहे वे सरकारी हों या निजी, में न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये होगा? इसके लिए नया विधेयक आ सकता है।
महंगाई आम आदमी के पेट पर भारी पड़ रही है। अब केंद्र सरकार देश के वित्तीय संकट को दूर करने के लिए ऐसा फैसला ले सकती है। भारत में लाखों कर्मचारी बहुत कम वेतन पर काम करते हैं।
कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जिनका पारिश्रमिक उनके श्रम के मुकाबले कम है। अब सरकार इस अंतर को पाटने की ओर अग्रसर है। सूत्रों के मुताबिक अगर यह नया विधेयक आता है तो न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये हो जाएगा।
यानी सरकारी या निजी संगठनों में 20,000 रुपये से कम वेतन नहीं दिया जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक इस विधेयक में सालाना वेतन वृद्धि का प्रावधान भी शामिल होगा।
मोदी सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि अधिक पारिश्रमिक पाने वालों का वेतन कम न हो। शिक्षा को तीन स्लैब में आंका जा सकता है। उन तीन स्लैब के आधार पर वेतन दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, हायर सेकेंडरी पास करने वालों को न्यूनतम 20,000 रुपये दिए जाने चाहिए और ग्रेजुएट को 30,000 रुपये से कम वेतन नहीं दिया जा सकता।
अगर आपके पास पोस्टग्रेजुएट डिग्री है तो न्यूनतम वेतन 35,000 रुपये होगा। सूत्रों से पता चला है कि मोदी सरकार ऐसा विधेयक लाने जा रही है।
हालांकि, मोदी सरकार ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि यह खबर सच है या झूठ। हालांकि, पता चला है कि अगर यह सच है तो यह नया विधेयक इसी साल पारित हो सकता है।