केंद्र सरकार ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किया है। इससे ठीक पहले ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसरुद्दीन चिश्ती का बयान सामने आया है। उनका कहना है, 'लोग लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे। लोगों को उम्मीद है कि एक अच्छा विधेयक आएगा। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन मुझे पता चला है कि विपक्ष की मुख्य आपत्तियों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसलिए यह एक बहुत अच्छा विधेयक होगा। अब वक्फ का पैसा आम और गरीब मुसलमानों तक पहुंचेगा।'
बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय
वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए स्पीकर ओम बिरला ने 8 घंटे का समय तय किया है। यह पहली बार नहीं है जब वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन किया जा रहा है। यूपीए सरकार के दौरान 2013 में भी इस कानून में संशोधन किए गए थे। सत्तारूढ़ गठबंधन को विधेयक पर बहस के लिए 4 घंटे 40 मिनट का समय दिया गया है। लोकसभा में बहस के लिए भाजपा, कांग्रेस, जदयू, टीडीपी समेत कई दलों ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है।
सरकार विधेयक पर चर्चा चाहती है- रिजिजू
मंगलवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दोहराया कि सरकार विधेयक पर चर्चा चाहती है और सभी राजनीतिक दलों को इस पर बोलने का अधिकार है। देश यह भी जानना चाहता है कि किस दल का क्या रुख है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहता तो उसे ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता।
'अधिनियम में सुधार की जरूरत'
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है कि वर्ष 2013 में अधिनियम में व्यापक संशोधन किए गए थे। इसमें आगे कहा गया है, 'संशोधनों के बावजूद, यह देखा गया है कि राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों, वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और सर्वेक्षण, अतिक्रमणों को हटाने, वक्फ की परिभाषा सहित संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए अधिनियम में अभी भी और सुधार की आवश्यकता है।' इसमें कहा गया है कि 2013 में अधिनियम में संशोधन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और वक्फ और केंद्रीय वक्फ परिषद की संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर और अन्य हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद किया गया था। विधेयक 2024 का एक प्रमुख उद्देश्य वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलकर एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 करना है।
अधिनियम में करीब 40 बदलाव करने का है लक्ष्य
आपको बता दें, केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड अधिनियम में करीब 40 बदलाव करना चाहती है। एक महत्वपूर्ण बदलाव वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश हो सकता है। इसका उद्देश्य महिलाओं और अन्य मुस्लिम समुदायों की भागीदारी बढ़ाना है। साथ ही, नए विधेयक से बोर्ड पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है। विधेयक पर चर्चा और उसके बाद उसकी मंजूरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार द्वारा निचले सदन में एनडीए की संख्यात्मक श्रेष्ठता को दर्शाने के लिए शक्ति प्रदर्शन के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।