राजस्थान के इस जिले में पुलिसवाले के बेटे ने ही सरकार को लगाया लाखों का चूना, सालों तक नाम पर लेता रहा पेंशन
aapkarajasthan April 02, 2025 11:42 PM

राजस्थान में पेंशन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां एक बेटा अपने पिता की मौत के बाद भी फर्जीवाड़ा करके उनकी पेंशन लेता रहा। पेंशन को लेकर फर्जीवाड़ा एक-दो महीने नहीं चला, बल्कि बेटे का फर्जीवाड़ा 3 साल तक चलता रहा। इस तरह युवक ने पिता की मौत के बाद भी उनके नाम से पेंशन ली और सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाया। बाद में आरोपी युवक के गांव के ही एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत की तो फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। आरोप साबित होने पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पिता का बनवाया जीवन प्रमाण पत्र
जानकारी के अनुसार हरियाणा के महेंद्रगढ़ में नारनौल सदर थाने के कुलताजपुर निवासी भगवान सिंह राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद से रिटायर हुए थे। इसके बाद 24 सितंबर 2021 को भगवान सिंह की मौत हो गई। लेकिन, उनके बेटे प्रदीप ने फर्जीवाड़ा करके अपने पिता का जीवन प्रमाण पत्र बनवा लिया और बैंक व बुहाना ट्रेजरी ऑफिस में देकर भगवान सिंह के नाम से पेंशन लेता रहा।

गांव के ही एक युवक ने दर्ज कराई थी शिकायत
बेटे ने अपने मृत पिता के नाम पर 3 साल तक पेंशन लेने का खेल जारी रखा। पुलिस ने बताया कि राजस्थान पुलिस में पदस्थ भगवान सिंह के बेटे प्रदीप ने तीन साल में 8 लाख 20 हजार 738 रुपए पेंशन ले ली। उसके गांव के ही राहुल ने इस धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस में की। प्रदीप ने अपने मृत पिता के हस्ताक्षर कर तीन साल में 3 फर्जी जीवन प्रमाण पत्र जमा करवाए। उसने पहला जीवन प्रमाण पत्र सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को विश्वास में लेकर सत्यापित करवाया।

आरोपी युवक पंचायत थाने में पंच है
उसने दो जीवन प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान उन पर दो अलग-अलग स्कूलों की मुहर लगाकर फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। जब आरोपी की चोरी पकड़ी गई तो उसने तुरंत 8 लाख 20 हजार 738 रुपए सरकारी खजाने में जमा करवा दिए, लेकिन पुलिस ने प्रदीप के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

आरोपी प्रदीप अपनी ग्राम पंचायत थाने में पंच भी है। वहीं, शिकायतकर्ता राहुल भी प्रदीप के गांव का ही है, जिसने सितंबर 2024 में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने करीब छह महीने तक मामले की जांच की। इसके बाद जब आरोप साबित हुए तो करीब एक महीने बाद एफआईआर भी दर्ज की गई।

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