यादव ने कहा कि सभी लोग मिलकर काम करेंगे तभी देश की तरक्की हो सकती है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और मुसलमानों को यह नहीं लगे कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की बात पर भरोसा करना कठिन है क्योंकि उसने अतीत में जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया। ऐसे में सरकार पर कोई भरोसा कैसे कर सकता है?
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यादव ने विधेयक के प्रावधानों पर संदेह जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का उदाहरण सामने है जहां लोगों को नमाज अदा नहीं करने दिया गया, यहां तक कि लोगों को अपनी छतों पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को सरकार पर भरोसा नहीं है।
चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (उबाठा) सदस्य संजय राउत ने कहा कि भाजपा मुसलमानों की इतनी चिंता कर रही है जितनी कि (मोहम्मद अली) जिन्ना ने भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ध्यान भटकाने की रणनीति है क्योंकि (अमेरिका के) ट्रंप प्रशासन ने 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगा दिया है।
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राउत ने कहा कि सदन में चर्चा इस बात पर होनी चाहिए थी कि ट्रंप प्रशासन के फैसले का भारत पर क्या असर होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को कश्मीरी पंडितों की वापसी की चिंता करनी चाहिए। (भाषा)
Edited By : Chetan Gour