अदालत ने कहा कि इल्मी ने अपनी याचिका में संपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया। हालांकि, न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि वीडियो के उस हिस्से को रिकॉर्ड करना और प्रकाशित करना 'निजता के अधिकार' का उल्लंघन है, जिसमें इल्मी कार्यक्रम के दौरान खुद को अलग करतीं हुईं और कैमरे से हटती दिख रही हैं।
इल्मी ने बीच में छोड़ दिया था शो : दरअसल, इल्मी ने जुलाई 2024 में ‘अग्निवीर योजना’ विवाद पर सरदेसाई के समाचार चैनल पर आयोजित एक चर्चा में हिस्सा लिया था। इस दौरान दोनों के बीच कुछ तीखी नोकझोंक के बाद इल्मी ने शो बीच में ही छोड़ दिया। बाद में, वरिष्ठ पत्रकार ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसे इल्मी ने आपत्तिजनक और निजता का उल्लंघन बताया।
इल्मी के वकील ने अदालत में कहा कि शो खत्म हो गया था, मेरी सहमति खत्म हो गई थी। इसके बाद मेरी सहमति के बिना मेरे निजी स्थान पर मेरा वीडियो नहीं बनाया जा सकता था। अदालत ने कहा कि सरदेसाई और उनका चैनल इल्मी की स्पष्ट सहमति के बिना वीडियो के हिस्से को रिकॉर्ड या इस्तेमाल नहीं कर सकते थे।
और क्या कहा अदालत ने : अदालत ने कहा कि यदि इल्मी नहीं चाहती थीं कि माइक्रोफोन हटाते समय कैमरे से रिकॉर्डिंग न की जाए, तो उन्हें वीडियो रिकॉर्ड कर रहे पत्रकार से ऐसा कहना चाहिए था, इसकी पुष्टि करनी चाहिए थी और फिर अपना माइक्रोफोन हटाना चाहिए था। अदालत ने कहा कि वादी ने उपरोक्त में से कुछ भी नहीं किया, लेकिन जब उन्होंने लाइव डिबेट से हटने का निर्णय लिया, तो रिकॉर्डिंग के समय अपना माइक हटा लिया और कैमरे के सामने से हटने लगीं। (एजेंसी/वेबदुनिया)
Edited by: Vrijendra Singh Jhala