शिवपुरी का महाभारत कालीन गणेश मंदिर बना आस्था का केंद्र, गणेश महोत्सव पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Samachar Nama Hindi August 31, 2025 01:42 AM

गणेश महोत्सव के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का महाभारत कालीन प्राचीन गणेश मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। शिवपुरी के बाणगंगा मंदिर परिसर स्थित यह गणेश मंदिर अपनी ऐतिहासिकता और पौराणिक महत्व के कारण न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं को बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है।

महाभारत काल से जुड़ा इतिहास
मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय शिवपुरी क्षेत्र में निवास किया था। इसी दौरान अर्जुन ने अपने बाण से यहां 52 कुंडों का निर्माण किया था, जिनमें से एक कुंड पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई थी। तभी से यह स्थान गणेश जी के पूजन का केंद्र बना हुआ है।

स्थानीय पुरातत्वविद बताते हैं कि कुंड के ऊपर स्थापित गणेश प्रतिमा प्राचीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण है। प्रतिमा की संरचना और स्थापत्य शैली यह स्पष्ट करती है कि यह मंदिर सहस्त्राब्दियों पुराना है।

गणेश महोत्सव में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़
गणेश महोत्सव के दौरान इस मंदिर का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगने लगती हैं।

भक्तों का कहना है कि इस प्राचीन गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करने से हर प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेषकर गणेश चतुर्थी और गणेश महोत्सव के दिनों में यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ चरम पर पहुंच जाती है।

धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्व
यह मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बाणगंगा मंदिर परिसर में स्थित होने के कारण यहां आने वाले श्रद्धालु 52 कुंडों का भी दर्शन करते हैं। ऐतिहासिक महत्व के कारण यह स्थल शिवपुरी जिले के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

पर्यटन विभाग भी इस मंदिर को संरक्षित धरोहर के रूप में प्रचारित करने पर विचार कर रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग यहां की ऐतिहासिकता से परिचित हो सकें।

स्थानीय लोगों की भावनाएं
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मंदिर उनकी पीढ़ियों से आस्था का केंद्र रहा है। गणेश महोत्सव में यहां भव्य सजावट की जाती है और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। मंदिर परिसर में प्रसादी वितरण और भजन-कीर्तन का आयोजन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देता है।

© Copyright @2025 LIDEA. All Rights Reserved.