निजीकरण के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल, यूपी के एक लाख से अधिक बिजली कर्मी होंगे शामिल
Tarunmitra January 02, 2026 12:42 PM

लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में आगामी 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल में उत्तर प्रदेश के एक लाख से अधिक बिजली कर्मियों के शामिल होने का ऐलान किया है। नए साल के पहले दिन, निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर प्रदेशभर में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर “विरोध दिवस” मनाया।

संघर्ष समिति ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मी 12 फरवरी को एक दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कराने और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को वापस लेने की मांग को लेकर की जा रही है।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि आज हुई कोर कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि निजीकरण और बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।

हड़ताल की तैयारी को मजबूत करने के लिए संघर्ष समिति ने जनवरी माह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छह बड़ी बिजली महापंचायत आयोजित करने का निर्णय लिया है। ये महापंचायतें वाराणसी, ओबरा/अनपरा, आगरा, केस्को, मेरठ और लखनऊ में आयोजित होंगी। इन महापंचायतों में बिजली कर्मियों के साथ-साथ किसान, आम उपभोक्ता और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जनवरी माह में निजीकरण के विरोध में प्रदेशव्यापी सघन दौरा भी करेंगे और बिजली कर्मियों व आम जनता को निजीकरण से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करेंगे।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि 25 नवंबर 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय घोषित कर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने ऊर्जा निगमों का कार्य वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया है। समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान भी बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सेवाएं बनाए हुए हैं।संघर्ष समिति ने कहा कि अब समय आ गया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन निजीकरण का फैसला तत्काल निरस्त करे और आंदोलन के दौरान की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस ले। इसी मांग को लेकर आज प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। उक्त जानकारी संयोजक,विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश शैलेन्द्र दुबे ने दी।

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