Makar Sankranti 2026: सूर्यदेव के रथ में क्यों होते हैं 7 ही घोड़े और कौन करता है उनका संचालन?
TV9 Bharatvarsh January 02, 2026 12:42 PM

Surya Dev’s chariot: पंचांग के अनुसार, साल 2026 में मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा. इस दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण का आरंभ माना जाता है. मकर संक्रांति न केवल एक खगोलीय घटना है, बल्कि इसका गहरा धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व भी है. इसी अवसर पर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर उठता है कि सूर्यदेव के रथ में 7 ही घोड़े क्यों होते हैं और उनका संचालन कौन करता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ा पूरा रहस्य.

सात घोड़ों का प्रतीकात्मक अर्थ: सप्ताह के सात दिन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव के रथ में जुते सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों का प्रतीक हैं. यह इस बात को दर्शाता है कि सूर्य देव बिना रुके निरंतर गतिशील रहकर समय के चक्र को नियंत्रित करते हैं.

प्रकाश के सात रंग

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्य की सफेद किरणें असल में सात रंगों का मिश्रण होती हैं. शास्त्रों में इन सात घोड़ों को इंद्रधनुष के सात रंगों— बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल—का प्रतीक माना गया है. यह प्राचीन ऋषियों की वैज्ञानिक समझ का एक अद्भुत प्रमाण है.

वेदों के सात छंद

एक अन्य मान्यता के अनुसार, ये सात घोड़े वेदों के सात प्रमुख छंदों गायत्री, भृजाति, उष्णिह, जगती, त्रिष्टुप, अनुष्टुप और पंक्ति के प्रतीक हैं. सूर्य देव का रथ इन्हीं छंदों की शक्ति से संचालित होता है.

कौन करता है सूर्य के रथ का संचालन?

भगवान सूर्य के रथ का सारथि कोई साधारण पुरुष नहीं, बल्कि अरुण हैं.

अरुण भगवान सूर्य के सारथि हैं और वे पक्षीराज गरुड़ के बड़े भाई हैं.

महत्व: सारथि अरुण का स्थान सूर्य देव के ठीक सामने है. वे सूर्य की प्रचंड तपन को झेलते हैं ताकि पृथ्वी पर सीधे आने वाली तीव्रता कम हो सके और जीवन सुरक्षित रहे.

रथ की संरचना और मकर संक्रांति का महत्व

सूर्य के रथ में केवल एक ही पहिया होता है, जिसे ‘संवत्सर’ कहा जाता है. इस पहिये में 12 आरे होते हैं, जो साल के 12 महीनों को दर्शाते हैं.

मकर संक्रांति क्यों है खास?

मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसी दिन से सूर्य ‘उत्तरायण’ होते हैं, जिसका अर्थ है सूर्य का उत्तर की ओर झुकाव. माना जाता है कि उत्तरायण के समय देवताओं के दिन की शुरुआत होती है और स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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