चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने नए साल में मातृशक्ति को एक महत्वपूर्ण उपहार दिया है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना' के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब इस योजना का लाभ उन परिवारों की महिलाओं को भी मिलेगा जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है। इस निर्णय से लाखों नई महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
योजना के विस्तार के साथ, सरकार ने लाभार्थियों की नई श्रेणियां भी निर्धारित की हैं, जो शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित हैं। नए नियमों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में 10वीं या 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों की माताएं अब इस योजना की पात्र होंगी। इसके अतिरिक्त, निपुण (NIPUN) भारत मिशन के तहत कक्षा 1 से 4 तक ग्रेड-स्तरीय योग्यता प्राप्त करने वाले बच्चों की माताएं और अपने बच्चों को गंभीर या मध्यम कुपोषण से मुक्त कराने वाली माताएं भी लाभार्थी बन सकेंगी। हालांकि, सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया है कि तीन से अधिक बच्चों वाली माताओं को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार ने 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सहायता राशि के वितरण के तरीके में भी एक बड़ा बदलाव किया है। पात्र महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये मिलेंगे, लेकिन इसका उद्देश्य केवल तात्कालिक खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की बचत भी है। योजना के तहत पहले महीने पूरी राशि महिला के खाते में आएगी, लेकिन दूसरे महीने से यह दो हिस्सों में बांटी जाएगी। इसमें से 1,100 रुपये सीधे महिला के बचत खाते में जाएंगे, जबकि शेष 1,000 रुपये सरकार द्वारा संचालित आरडी (RD) या एफडी (FD) में जमा किए जाएंगे। यह जमा राशि 5 वर्ष की परिपक्वता अवधि पूरी होने पर ब्याज सहित लाभार्थी को मिलेगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ये बदलाव महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे, बल्कि उनमें बचत की आदत भी विकसित करेंगे। यह योजना 2024 विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रमुख वादा थी, जिसे सरकार बनने के बाद 25 सितंबर 2025 को लागू किया गया था। इस योजना के तहत 23 से 60 वर्ष की आयु वाली महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है और अब तक प्रदेश में 10 लाख से अधिक महिलाएं इसके लिए पंजीकरण करवा चुकी हैं। सरकार का मानना है कि शिक्षा और पोषण के मानकों को योजना से जोड़ने से सामाजिक सुधार की दिशा में बड़े परिणाम देखने को मिलेंगे।