नई दिल्ली: देश में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रही सुरक्षा कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है। वरिष्ठ माओवादी सैन्य कमांडर बरसे देवा, जिसे साईनाथ के नाम से भी जाना जाता है, ने शुक्रवार को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण किया। देवा पर 25.47 लाख रुपये का इनाम था और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसके आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
तेलंगाना पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देवा फिलहाल पुलिस हिरासत में है और शनिवार को उसे मीडिया के सामने पेश किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम देवा अपने कुछ साथियों के साथ छत्तीसगढ़ से तेलंगाना में दाखिल हुआ था। इसके बाद शुक्रवार को सभी को हैदराबाद लाया गया, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। सूत्रों के अनुसार, देवा के साथ लगभग 15 से 17 माओवादी कैडरों ने भी हथियार डाल दिए हैं।
45 वर्षीय बरसे देवा माओवादी संगठन की प्रमुख लड़ाकू इकाई, बटालियन नंबर-1 का प्रभारी था। इसके अलावा, वह 2021 से एरिया जोनल कमेटी सदस्य (AZCM) के रूप में भी कार्यरत था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बटालियन नंबर-1 को माओवादियों की आखिरी संगठित सैन्य ताकत माना जाता था, जो बड़े हमलों की योजना और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।
देवा, कुख्यात माओवादी नेता माडवी हिदमा का करीबी सहयोगी रहा है। हिदमा हाल ही में आंध्र प्रदेश के मारेडुमिल्ली जंगलों में एक मुठभेड़ में मारा गया था। इसके बाद देवा ने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के प्रमुख के रूप में सशस्त्र अभियानों की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों ही सुकमा जिले के पुवर्ती गांव के निवासी थे, जो लंबे समय से माओवादियों का गढ़ माना जाता रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, देवा और हिदमा ने मिलकर कई बड़े और खूनी हमलों की योजना बनाई थी। इनमें 25 मई 2013 को दरभा घाटी में कांग्रेस के काफिले पर हुआ हमला शामिल है, जिसमें 27 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2021 में सुकमा-बीजापुर सीमा पर हुए हमले में 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इन घटनाओं ने माओवादी हिंसा को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि देवा हथियारों की खरीद, रसद प्रबंधन, हमलों की रणनीति और सशस्त्र दस्तों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। उसके आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने उसके पास से एक लाइट मशीन गन (LMG) बरामद की है। साथ ही, उसकी सैन्य टीम के कई सदस्यों ने भी हथियार डाल दिए हैं।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि कभी लगभग 130 सशस्त्र कैडरों वाली बटालियन नंबर-1 पहले ही सुरक्षा अभियानों के चलते कमजोर हो चुकी थी। अब देवा के आत्मसमर्पण के बाद इसके बचे हुए सदस्य भी जल्द सामने आ सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि हिदमा की मौत और देवा के आत्मसमर्पण से पीएलजीए की कमर टूट गई है और माओवादी संगठन की संगठित हिंसक क्षमता पर गहरा असर पड़ा है।