बाबा रामदेव ने बताया (ref.) कि हर घर में बनने वाली हरी चटनी सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है। इसे बनाना बहुत आसान है और यह कई तरह से शरीर को फायदा देती है। चटनी में आप हरा धनिया, थोड़ी हरी मिर्च, थोड़ा टमाटर, कुछ तुलसी पत्ते मिला सकते हैं।
बाबा ने बताया कि हरा धनिया पाचन सुधारता है, हरी मिर्च स्वाद बढ़ाती है, तुलसी इम्यूनिटी बढ़ाती है और टमाटर पेट के हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करता है। ऐसी इम्यूनिटी बूस्टर चटनी अगर रोज या सप्ताह में 3-4 बार खाई जाए, तो किडनी और पाचन दोनों बेहतर रहते हैं।
जौ किडनी के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। सप्ताह में 1-2 बार जौ का आटा खाने से किडनी कमजोर नहीं होती। जौ शरीर की गर्मी कम करता है, सूजन घटाता है और शरीर को संतुलित रखता है। जिन लोगों को यूरिक एसिड, पानी रुकना, सूजन या बार-बार किडनी इंफेक्शन की दिक्कत रहती है, उनके लिए जौ बेहद फायदेमंद है।
तिल में कोलेजन, प्रोटीन और हेल्दी फैट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो त्वचा, बाल, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि जो लोग नियमित रूप से तिल खाते हैं, उनकी त्वचा में चमक रहती है और शरीर मजबूत बना रहता है। तिल की चटनी या तिल के लड्डू शरीर को तुरंत फायदा देते हैं, खासकर जब तिल को बारीक पीसकर खाया जाए।
सर्दियों में खासतौर पर गोंद के लड्डू खाने की सलाह दी जाती है। गोंद हड्डियों को मजबूत करता है, जोड़ों के दर्द को कम करता है और शरीर में गर्मी बनाए रखता है। बचपन में खाए गए गोंद और तिल के लड्डू लंबे समय तक शरीर में ताकत बनाए रखते हैं।
गोंद के लड्डू खाने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं, कैल्शियम और फॉस्फोरस की कमी दूर होती है, विटामिन डी और बी12 की कमी कम होती है और मांसपेशियाँ मजबूत रहती हैं। ध्यान रखें कि ये लड्डू थोड़े भारी होते हैं, इसलिए इन्हें खाते समय पाचन का ध्यान रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। nh इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।