सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला सोना चोरी मामले में के.पी. शंकर दास की याचिका खारिज की
Gyanhigyan January 06, 2026 02:42 AM
सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी का मामला

सबरीमाला मंदिर

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सोने की चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व सदस्य के.पी. शंकर दास की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने शंकरदास को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने भगवान को भी नहीं बख्शा है।

5 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान, जस्टिस दीपांकर दत्त और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने केरल हाई कोर्ट के आदेश में की गई टिप्पणियों को हटाने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने तो भगवान को भी नहीं छोड़ा। कम से कम मंदिर और भगवान को तो बख्श दीजिए।

मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देवस्वोम बोर्ड के सदस्य के रूप में के.पी. शंकर दास की जिम्मेदारी मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा करना थी, लेकिन उन पर सोने की चोरी और हेराफेरी के आरोप भी लगे हैं। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है, फिर भी हाई कोर्ट ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत दी थी। कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि आरोप कमजोर हैं या अपराध की मेरिट पर कोई टिप्पणी की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को किया खारिज

केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि के.पी. शंकर दास और के. विजयकुमार सोने की चोरी और हेराफेरी की आपराधिक साजिश से बच नहीं सकते। हाई कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद दास ने आदेश के कुछ पैराग्राफ हटाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान शंकर दास के वकील के तर्कों को सुनने के बाद इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि केरल हाई कोर्ट की टिप्पणियां मामले के तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं है।

यह मामला सबरीमाला मंदिर से जुड़ा होने के कारण पहले से ही सुर्खियों में था। मंदिर की संपत्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितता और चोरी के आरोपों ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया था। कोर्ट के इस फैसले को मंदिर प्रशासन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। दास की याचिका खारिज होने से केरल हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रहेगा.


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