भारत के स्टील उद्योग में एंटी-ट्रस्ट जांच: 28 कंपनियों पर कार्रवाई की तैयारी
newzfatafat January 07, 2026 03:42 AM
स्टील सेक्टर में हलचल

हाल ही में देश के स्टील उद्योग में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जिसने बाजार और उद्योग दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले हैं, जिनका भविष्य में गहरा प्रभाव पड़ सकता है।


एंटी-ट्रस्ट कानून का उल्लंघन

CCI ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, और सरकारी कंपनी सेल सहित कुल 28 स्टील कंपनियों को एंटी-ट्रस्ट कानून का उल्लंघन करने का दोषी पाया है। आयोग ने यह पाया कि इन कंपनियों ने 2015 से 2023 के बीच स्टील की बिक्री कीमतों में आपसी मिलीभगत की थी। इस मामले से संबंधित आदेश 6 अक्टूबर को जारी किया गया था, लेकिन इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।


अधिकारियों की जिम्मेदारी

इस जांच में केवल कंपनियों को ही नहीं, बल्कि 56 शीर्ष अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें जेएसडब्ल्यू स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी. वी. नरेंद्रन, और सेल के चार पूर्व चेयरमैन शामिल हैं। आयोग ने बताया कि इन अधिकारियों की भूमिका कीमत तय करने की प्रक्रिया में पाई गई है।


जांच की पृष्ठभूमि

यह जांच 2021 में शुरू हुई थी, जब तमिलनाडु की कोयंबटूर कॉरपोरेशन कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अदालत में आरोप लगाया था कि कुछ स्टील कंपनियां आपूर्ति सीमित कर दाम बढ़ा रही हैं। आरोप था कि छह महीनों में स्टील की कीमतों में लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे निर्माण क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।


सीसीआई की कार्रवाई

अदालत ने इस मामले को प्रतिस्पर्धा से संबंधित मानते हुए CCI को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और इसमें 31 कंपनियां, कई उद्योग संगठन और कई अधिकारी शामिल हुए। CCI के नियमों के अनुसार, कार्टेल जैसे मामलों का विवरण अंतिम आदेश से पहले सार्वजनिक नहीं किया जाता।


जांच में व्हाट्सऐप चैट्स की भूमिका

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान व्हाट्सऐप चैट्स की समीक्षा की गई, जिसमें क्षेत्रीय उद्योग समूहों के बीच कीमत तय करने और उत्पादन घटाने की बातचीत के संकेत मिले। आयोग ने संभावित जुर्माने की गणना के लिए कंपनियों से आठ वित्तीय वर्षों तक के ऑडिटेड वित्तीय विवरण भी मांगे हैं।


भारत का स्टील उद्योग

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा स्टील उत्पादक देश है, और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते सरकारी खर्च के कारण मांग लगातार बढ़ रही है। यदि आरोप अंतिम आदेश में साबित होते हैं, तो CCI कंपनियों पर मुनाफे का तीन गुना या टर्नओवर का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकता है। व्यक्तिगत अधिकारियों पर भी आर्थिक दंड संभव है।


कंपनियों का बचाव

हालांकि, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल ने आयोग के समक्ष इन आरोपों से इनकार किया है और अपनी सफाई पेश की है। अंतिम निर्णय आने में अभी कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि कंपनियों और अधिकारियों को अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया जाएगा। इस मामले ने भारतीय स्टील उद्योग में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता पर नई बहस को जन्म दिया है।


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