गरुड़ पुराण: यमलोक के वो 4 द्वार, जिनसे तय होता है स्वर्ग और नरक का सफर..
Himachali Khabar Hindi January 08, 2026 05:42 AM


Garuda Purana: सनातन धर्म में जन्म और मृत्यु को एक अविराम चक्र माना गया है. जो इस मृत्युलोक में आया है, उसे एक न एक दिन शरीर त्यागना ही पड़ता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्राण निकलने के बाद आत्मा कहाँ जाती है? गरुड़ पुराण, जो 18 महापुराणों में से एक है, इस गुत्थी को सुलझाता है. मान्यता है कि मृत्यु के बाद आत्मा को एक दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है, जिसके सहारे वह यमलोक की कठिन यात्रा शुरू करती है. यमराज के इस विशाल नगर में प्रवेश के लिए चार मुख्य द्वार हैं, और प्रत्येक द्वार आत्मा के संचित कर्मों के आधार पर ही खुलता है. आइए जानते हैं यमलोक के 4 द्वार कौन-कौन से हैं और पापी आत्माओं के लिए कौन सा रास्ता नरक की ओर जाता है.

यमलोक के चार द्वार
गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा की शुद्धि और उसके पाप-पुण्य की जांच इन चार दिशाओं के द्वारों पर होती है. पूर्व द्वारा जो कि योगियों और सिद्धों का मार्ग कहा जाता है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। यह द्वार देखने में अत्यंत मनमोहक और अलौकिक है. यहां बहुमूल्य रत्न जैसे हीरा, नीलम और पुखराज जड़े होते हैं. यह द्वार उन आत्माओं के लिए खुलता है जिन्होंने अपना जीवन योग, ध्यान और ईश्वर की भक्ति में समर्पित कर दिया हो. इस द्वार पर देवताओं और गंधर्वों द्वारा आत्मा का भव्य स्वागत किया जाता है.

सत्यवादियों और सेवकों का प्रवेश द्वार
यह द्वार भी स्वर्ण और रत्नों से सुसज्जित होता है. उत्तर द्वार से उन आत्माओं को प्रवेश मिलता है जिन्होंने अपने जीवन में माता-पिता की निस्वार्थ सेवा की हो, सदैव सत्य का साथ दिया हो और अहिंसा के मार्ग पर चली हों. परोपकारी और दयालु आत्माएं इसी मार्ग से आगे बढ़ती हैं.

दानियों और धर्मपरायणों का रास्ता
पश्चिम दिशा का द्वार उन लोगों के लिए आरक्षित है जिन्होंने अपने जीवन काल में दान-पुण्य को प्राथमिकता दी और धर्म के नियमों का पालन किया. तीर्थ यात्रा करने वाली और पवित्र विचार रखने वाली आत्माओं को इस मार्ग से सुखद अनुभव प्राप्त होता है.

गरुड़ पुराण में दक्षिण द्वार का वर्णन रोंगटे खड़े कर देने वाला है. इसे नरक का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. यह द्वार उन लोगों के लिए खुलता है जिन्होंने जीवन भर अधर्म, हिंसा, चोरी, और दूसरों को पीड़ा पहुंचाने का काम किया. यहां का रास्ता कांटों, तप्त अग्नि और भयानक अंधकार से भरा होता है. पापी आत्माओं को यमदूत यहां से घसीटते हुए ले जाते हैं, जहां उन्हें उनके कृत्यों की भीषण सजा भुगतनी पड़ती है.

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