ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में एक महत्वपूर्ण हलचल देखी जा रही है, जिसने पश्चिमी देशों में चिंता पैदा कर दी है। वर्षों तक चांदी का नियंत्रण लंदन और न्यूयॉर्क के हाथों में रहा, लेकिन 2025 में भारत ने एक नई भूमिका निभाई है। चांदी, जिसे कभी गरीबों का सोना कहा जाता था, ने पिछले 12 महीनों में लगभग 180 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिससे उद्योग, निवेशक और नीति-निर्माता सभी प्रभावित हुए हैं। चीन, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, ने 1 जनवरी से चांदी के निर्यात पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे आने वाले महीनों में इसकी मांग बनी रहने की संभावना है। पिछले 45 वर्षों में चांदी की कीमतों में लगभग 88 गुना वृद्धि हुई है।
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के हालिया आंकड़ों ने वैश्विक बाजार को चौंका दिया है। 2025 के प्रारंभिक महीनों में भारत ने लगभग 6,000 मीट्रिक टन चांदी का आयात किया है, जो कि वैश्विक वार्षिक खनन का लगभग 25 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चांदी अब लंदन की तिजोरियों से निकलकर सीधे भारतीय बाजार में पहुंच गई है, जहां से इसका वापस वैश्विक बाजार में आना मुश्किल है।
पहले यह माना जाता था कि भारतीय खरीदार केवल कीमतों में गिरावट पर चांदी खरीदते हैं, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। भारत अब 'बाइंग द रिप' की रणनीति अपना रहा है, जिसका अर्थ है कि वे बढ़ती कीमतों पर भी चांदी खरीद रहे हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की 'पेपर' कीमत कम दिखाई दे रही है, मुंबई के हाजिर बाजार में इसकी कीमत लगभग $75 प्रति औंस तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि भारत ने पश्चिमी देशों के कागजी भाव को नकार दिया है।
चांदी की बढ़ती मांग के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, भारत सरकार की पीएलआई योजना के तहत सोलर पैनल की विशाल फैक्ट्रियों का निर्माण हो रहा है, जिसमें चांदी की आवश्यकता है। दूसरी ओर, ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ती नजदीकी और डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत, भारत चांदी को एक 'हार्ड एसेट' के रूप में देख रहा है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में चांदी की भूमिका महत्वपूर्ण है। सेमीकंडक्टर, 5G नेटवर्क और डेटा सेंटर्स में चांदी का उपयोग बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों में भी चांदी की मांग बढ़ रही है, जिससे इसकी कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि हम एक ऐतिहासिक 'शॉर्ट स्क्वीज' की ओर बढ़ रहे हैं। जब पश्चिमी एक्सचेंजों के पास चांदी की फिजिकल डिलीवरी देने के लिए पर्याप्त मात्रा नहीं होगी, तब कीमतों में अचानक वृद्धि हो सकती है। भारत की आक्रामक खरीदारी चांदी को जल्द ही 'ट्रिपल डिजिट' में धकेल सकती है।
चांदी की कीमतों में वृद्धि के पीछे भू-राजनीतिक कारण भी हैं। अमेरिका ने चांदी और तांबे को रिवर मेटल की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे चीन ने चांदी के निर्यात पर सख्ती बढ़ा दी है। इससे चांदी की कीमतें और बढ़ने की संभावना है।