सुधा चंद्रन का उन ट्रोलर्स को सीधा जवाब ,कला और भक्ति मेरी अपनी है, मैं किसी को सफ़ाई देने नहीं आई हूँ
Newsindialive Hindi January 08, 2026 09:42 AM

News India Live, Digital Desk : आजकल सोशल मीडिया का दौर है और यहाँ लोग किसी भी बात पर अपनी राय देने या जज (Judge) करने से पीछे नहीं हटते। मामला शुरू हुआ सुधा चंद्रन के एक डांस वीडियो से, जहाँ वह एक भक्तिमय जागरण में परफॉर्म कर रही थीं। वैसे तो ज़्यादातर लोगों ने उनके जज्बे की सराहना की, लेकिन कुछ लोगों को धार्मिक आयोजन में उनका अंदाज़ शायद पसंद नहीं आया और उन्होंने कमेंट्स के ज़रिए उन पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिया।सुधा चंद्रन ने क्या कहा?आमतौर पर ऐसी बातों पर चुप रहने वाली सुधा चंद्रन ने इस बार सामने आकर अपनी बात रखने का फैसला किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह यहाँ किसी को 'जस्टिफाई' (सफाई देने) के लिए नहीं खड़ी हैं। सुधा ने साफ कहा कि एक कलाकार के तौर पर उनका काम उनकी साधना है। जब वह किसी आध्यात्मिक कार्यक्रम में नाचती हैं, तो वह नाच नहीं होता, बल्कि उनकी अपने आराध्य के प्रति एक प्रार्थना होती है।"मैं सफाई देने वाली कौन होती हूँ?"उन्होंने अपनी बातों में ज़ोर देकर कहा कि उनकी भक्ति उनके दिल के भीतर का विषय है। वह कहती हैं कि दुनिया को क्या लगता है, इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनका ऊपर वाले से एक सीधा रिश्ता है। सालों से उन्होंने अपनी कला को जीया है और अपनी शारीरिक अक्षमता (जयपुर फुट वाली ऐतिहासिक कहानी) के बावजूद जिस मकाम पर वह आज हैं, वो सब ईश्वर की ही देन है। ऐसे में चंद कमेंट्स के आधार पर अपनी सालों की मेहनत और आस्था पर स्पष्टीकरण देना वह सही नहीं मानतीं।सच कहें तो सुधा चंद्रन का यह रिएक्शन उन सभी के लिए एक संदेश है जो बात-बेबात पर किसी की भी निष्ठा या काम पर सवाल उठाने लगते हैं। कलाकार का मंच उसके लिए मंदिर की तरह होता है और जब बात भक्ति की हो, तो हर व्यक्ति का अपना एक अलग अंदाज़ होता है।सुधा चंद्रन ने दिखा दिया कि चाहे 'रम्मी' का रोल हो या किसी 'जागरण' में नृत्य, वह पूरी शिद्दत और पवित्रता के साथ अपनी कला का प्रदर्शन करना जानती हैं। और हाँ, वह बिना डरे अपनी शर्तों पर अपनी ज़िंदगी जीना भी जानती हैं।

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