कोरोना की मार, मदद का झांसा और धर्मांतरण का जाल: कानपुर देहात में 'स्किल सेंटर' की आड़ में बड़ा खेल उजागर
Tarunmitra January 11, 2026 11:42 AM

कानपुर ।कोरोना महामारी के उस कठिन दौर में, जब रोज़गार छिन गया था और दो वक्त की रोटी भी चुनौती बन गई थी, कानपुर देहात में मदद के नाम पर एक ऐसा जाल बुना गया, जिसने लोगों की मजबूरी को हथियार बना लिया। अकबरपुर थाना क्षेत्र से महज़ एक किलोमीटर दूर, बंद पड़े एक स्कूल की इमारत में शुरू हुआ कथित “व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र” धीरे-धीरे धर्मांतरण के बड़े नेटवर्क का अड्डा बन गया।शुरुआत भरोसे से हुई। सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और तकनीकी प्रशिक्षण के वादे किए गए। कहीं हैंडपंप लगवाए गए, कहीं छोटी-छोटी जरूरतों की चीजें बांटी गईं। आर्थिक रूप से कमजोर और अनुसूचित जाति के लोगों को यह मदद किसी वरदान से कम नहीं लगी। लेकिन यही भरोसा बाद में धर्मांतरण के मकड़जाल में बदल गया।

कन्नौज से कानपुर देहात तक जुड़ी कड़ियां

कन्नौज जिले में धर्मांतरण गिरोह के सदस्य पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अहम सुराग मिले। जांच में पता चला कि इस नेटवर्क की जड़ें कानपुर देहात तक फैली हैं। एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय के निर्देश पर गठित एसआईटी ने करीब एक महीने तक गोपनीय जांच की और आखिरकार शनिवार को नवाकांती सोसाइटी से जुड़े तीन अहम किरदार—डेनियल शरद सिंह, हरिओम त्यागी और सावित्री शर्मा—को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के मुताबिक, डेनियल शरद सिंह का मूल नाम शरद सिंह है, जिसने धर्म परिवर्तन के बाद अपने नाम के आगे “डेनियल” जोड़ा। यह संस्था पहले एक स्कूल के रूप में संचालित होती थी, जो कोविड में बंद हो गई। बाद में उसी भवन में स्किल डेवलपमेंट एकेडमी के नाम पर गतिविधियां शुरू की गईं।

क्लब, प्रार्थना सभा और ‘लालच का मॉडल’

जांच में सामने आया कि गिरोह ने गांव-गांव क्लब बनाकर काम किया।गृह कलीसिया’ के तहत गांव के ही किसी युवक के घर में अस्थायी चर्च चलाया जाता था। यहां प्रार्थना सभा के जरिए गरीबी से मुक्ति और ईसाई धर्म की खूबियां गिनाकर लोगों को प्रभावित किया जाता।दूसरा समूह ‘अवाना’ था, जिसका फोकस बच्चों पर था।प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए 200 रुपये दिए जाते थे। धर्म प्रचार और नए लोगों को जोड़ने वालों को 6 से 10 हजार रुपये मासिक वेतन, उपहार और अन्य खर्चे दिए जाते थे। यह पूरी व्यवस्था किसी चेन सिस्टम या चिटफंड मॉडल की तरह चलाई जा रही थी।

विदेशी फंडिंग और संदिग्ध कनेक्शन

एसआईटी को संस्था के भवन से कई अहम कागजात मिले हैं। करीब 50 हैंडपंप लगाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिन पर लगभग 50 हजार रुपये प्रति हैंडपंप खर्च होने का अनुमान है। आरोप है कि इस फंडिंग के तार विदेश से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को कुछ तस्वीरें भी मिली हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग बाइबिल पढ़ते और प्रार्थना करते दिख रहे हैं—कुछ चेहरे विदेशी प्रतीत हो रहे हैं।संस्था का पंजीकरण आंध्रप्रदेश के मछलीपट्टनम से होना भी जांच के दायरे में है। बैंक खातों, आईडी दस्तावेजों और अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय संपर्कों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

सख्त धाराओं में मुकदमा

निबौली निवासी रामभरोसे की शिकायत पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धाराएं 3, 5(1), 5(2) और 5(3) लगाई हैं। इन धाराओं में महिला, नाबालिग और अनुसूचित जाति के लोगों के साथ धोखाधड़ी, जबरन धर्मांतरण और विदेशी फंडिंग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनमें 3 साल से लेकर 14 साल तक की सजा का प्रावधान है।

कई जिलों तक फैला नेटवर्क

पुलिस जांच में संकेत मिले हैं कि इस गिरोह के तार औरैया, जालौन, कानपुर नगर, फतेहपुर, झांसी, चंदौली और अन्य जिलों तक फैले हो सकते हैं। मिर्जापुर में भी दिसंबर में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।कानपुर देहात में सामने आई यह कहानी सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि उस साजिश की है जिसमें महामारी की मजबूरी, बेरोजगारी और भूख को धर्मांतरण का जरिया बनाया गया। अब एसआईटी की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं—कितने लोग बदले गए, पैसा कहां से आया और इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से चेहरे हैं?

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