केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को केरल की राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने राज्य की सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) पर कड़ी आलोचना की। शाह ने कहा कि भले ही केरल बाहरी तौर पर शांत प्रतीत होता है, लेकिन अंदर कई ऐसे खतरे मौजूद हैं जो भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।
गृह मंत्री ने केरल कौमुदी द्वारा आयोजित एक कॉन्क्लेव में कहा कि LDF और UDF दोनों कट्टरपंथी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने में असफल रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ये राजनीतिक दल इन संगठनों को अपने वोट बैंक के रूप में देखते हैं, इसलिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करते। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि केवल NDA ही केरल की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
अमित शाह ने केंद्र द्वारा प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और जमात-ए-इस्लामी का उदाहरण देते हुए कहा कि क्या LDF या UDF इन संगठनों से केरल को सुरक्षित रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसका उत्तर स्पष्ट रूप से 'नहीं' है। गृह मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने PFI पर प्रतिबंध लगाकर उसके नेटवर्क पर कार्रवाई की, जिससे देश की सुरक्षा को मजबूती मिली।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि PFI पर प्रतिबंध के निर्णय पर LDF और UDF ने न तो समर्थन किया और न ही विरोध। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुप्पी दर्शाती है कि राज्य की राजनीति में सुरक्षा से ज्यादा वोट बैंक को प्राथमिकता दी जा रही है। अमित शाह ने कहा कि छिपे हुए खतरों को समय पर पहचानना अत्यंत आवश्यक है।
अमित शाह ने अपने भाषण में सुरक्षा को विकास से जोड़ते हुए कहा कि केवल सुरक्षित केरल ही विकसित केरल बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब केरल जैसे राज्य भी सुरक्षित और मजबूत होंगे।
गृह मंत्री ने दोहराया कि NDA ही केरल को सुरक्षा और विकास दोनों प्रदान कर सकती है। उनके अनुसार, राज्य में स्थायी शांति और प्रगति के लिए मजबूत नेतृत्व और कठोर निर्णय आवश्यक हैं, जो केवल NDA के पास हैं।