आज की जीवनशैली और बदलते मौसम में कई लोगों को रातों में नींद न आना, पेट में जलन या एसिडिटी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आयुर्वेद में अर्जुन छाल (Terminalia arjuna bark) को लंबे समय से दिल, पेट और नींद से जुड़ी समस्याओं के लिए औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञ इसे एक प्राकृतिक संजीवनी मानते हैं।
अर्जुन छाल का काढ़ा – स्वास्थ्य का खजाना
अर्जुन छाल में टैनिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के कई अंगों को लाभ पहुंचाते हैं। इसे पानी या दूध में उबालकर काढ़ा बनाया जा सकता है।
जुदाई फायदे:
दिल की सेहत बनाए – अर्जुन छाल हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है, रक्तचाप संतुलित रखती है और हृदय रोग के जोखिम को कम करती है।
पेट और पाचन में राहत – काढ़ा पेट की जलन, एसिडिटी और गैस की समस्या कम करने में मदद करता है।
नींद में सुधार – रात को हल्का गर्म काढ़ा पीने से स्ट्रेस कम होता है और नींद बेहतर आती है।
एंटीऑक्सीडेंट गुण – शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में सहायक।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए – नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
काढ़ा बनाने का सही तरीका
सामग्री: अर्जुन छाल 5-10 ग्राम, पानी 250-300 मिलीलीटर।
तरीका: पानी में अर्जुन छाल डालकर 10-15 मिनट उबालें। ठंडा होने पर छानकर सेवन करें।
सेवन: दिन में 1-2 बार, सुबह खाली पेट या रात में सोने से पहले।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूध या हल्का शहद मिलाकर सेवन करने से स्वाद भी बढ़ता है और काढ़े के गुण और प्रभाव बढ़ जाते हैं।
सावधानियां
उच्च रक्तचाप या किसी गंभीर हृदय रोग की स्थिति में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों को विशेषज्ञ की अनुमति के बिना काढ़ा न पिलाएं।
अत्यधिक सेवन से पेट में हल्की असहजता हो सकती है, इसलिए नियमित मात्रा का पालन करें।
यह भी पढ़ें:
बीएमसी चुनाव से पहले अन्नामलाई के बयान ने मचाई हलचल, मुंबई पर कही यह बात