आयुर्वेदिक इलाज ने बढ़ाई उम्मीदें, पत्थरचट्टा से पथरी भी हो सकती है गायब
Navyug Sandesh Hindi January 13, 2026 10:42 PM

पत्थरी की समस्या आज के समय में आम हो गई है। पथरी के कारण किडनी, मूत्राशय और पित्ताशय में दर्द, जलन और गंभीर मामलों में संक्रमण तक हो सकता है। जबकि मेडिकल इलाज महंगा और कभी-कभी जटिल होता है, आयुर्वेद में एक ऐसा प्राकृतिक और असरदार उपाय मौजूद है, जो पत्थरचट्टा पथरी को भी घटाने और निकालने में मददगार साबित हो सकता है।

क्या है यह आयुर्वेदिक उपाय?

विशेषज्ञों के अनुसार यह आयुर्वेदिक इलाज कुछ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और औषधियों का संयोजन है, जो शरीर में पथरी को घुलाने और मूत्र प्रणाली को साफ़ करने में मदद करता है। इसमें गुड़मार, पनियाँ और विशेष हर्बल अर्क शामिल हैं, जिन्हें चिकित्सक की सलाह के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है।

यह उपाय शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन बनाए रखता है, जिससे पथरी धीरे-धीरे टूटने लगती है और मूत्र के माध्यम से बाहर निकलने लगती है। मरीजों ने अनुभव साझा किया है कि 21 दिनों के भीतर कई मामलों में दर्द में कमी और मूत्र प्रवाह में सुधार देखा गया।

प्रयोग की सावधानियां

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ जोर देते हैं कि यह उपाय कभी भी 21 दिन से ज्यादा लगातार न करें। लंबे समय तक उपयोग से किडनी और यकृत पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा:

आयुर्वेदिक दवा का सेवन चिकित्सक के निर्देशानुसार करें।

पर्याप्त पानी पीना आवश्यक है, ताकि पथरी आसानी से मूत्र के माध्यम से बाहर निकल सके।

किसी भी अनहोनी प्रतिक्रिया या तेज दर्द की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

हालांकि आयुर्वेदिक उपचार को संपूर्ण चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाता, कई शोध बताते हैं कि जड़ी-बूटियों का सही संयोजन पथरी के घुलने की प्रक्रिया में सहायक हो सकता है। आयुर्वेदिक दवा मूत्र में क्रिस्टल निर्माण को रोकने और पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ने में भी योगदान देती है।

मरीजों का अनुभव

कई मरीजों ने साझा किया कि 21 दिन की अवधि में पथरी के कारण होने वाले दर्द, जलन और मूत्र की समस्या में स्पष्ट कमी आई। कुछ मामलों में पत्थरी पूरी तरह से बाहर निकल गई और सर्जरी की आवश्यकता समाप्त हो गई।

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