बीएमसी चुनाव में भाजपा-शिवसेना महायुति, शिवसेना (UBT)-MNS-NCP (शरद पवार) और कांग्रेस-वीबीए जैसे बड़े गठबंधन बनने के बावजूद शहर में कुल 15 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट्स’ देखने को मिल रही हैं. इससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ऐसे चुनाव में जहां हर सीट अहम है.
‘फ्रेंडली फाइट्स’ गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं. कुछ सीटों पर यह स्थिति सीट शेयरिंग को लेकर मतभेद के कारण बनी, जबकि कुछ जगहों पर इसे रणनीति के तहत विरोधी वोटों के बंटवारे की कोशिश भी माना जा रहा है.
फ्रेंडली फाइट में उलझी महायुति-MVAसबसे ज्यादा फ्रेंडली फाइट्स महायुति में भाजपा बनाम शिवसेना और भाजपा/शिवसेना बनाम रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) के बीच हैं. इसके अलावा भांडुप की एक सीट पर कांग्रेस और वीबीए आमने-सामने हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि गठबंधन की चर्चा चुनाव की घोषणा तक पूरी तरह तय नहीं हो पाईं. यहां तक कि नामांकन की अंतिम तारीख गुजर जाने के बाद भी कई प्रमुख दलों ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की. इसी असमंजस के चलते कुछ सीटों पर महायुति के उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके और कई जगहों पर एक ही गठबंधन के एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतर आए. नतीजतन 15 सीटों पर फ्रेंडली फाइट्स की स्थिति बनी.
महायुति में 14 सीटों पर फ्रेंडली फाइटभाजपा बनाम शिवसेना
वार्ड 116 (भांडुप): संगीता तुलसकर (कांग्रेस) बनाम सरदार राजकन्या विश्वास (वीबीए)
आरपीआई (आठवले) ने 11 सीटों पर उतारे उम्मीदवारबता दें कि आरपीआई (आठवले) महायुति का हिस्सा होने के बावजूद पार्टी ने 11 वार्डों में अपने आधिकारिक उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें पांच भाजपा के खिलाफ और छह शिवसेना के खिलाफ हैं. इस बीच विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा विधायक राहुल नरवेकर ने शिवसेना पर तंज कसते हुए कहा कि कोलाबा के वार्ड 225 में शिवसेना उम्मीदवार को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ेगा.
इसी वार्ड से राहुल नरवेकर की भाभी हर्षिता नरवेकर और शिवसेना की सुजाता सनप मैदान में हैं. वहीं वार्ड 226 में, जहां राहुल नरवेकर के भाई मकरंद नरवेकर चुनाव लड़ रहे हैं, शिवसेना के जोनल पदाधिकारी दीपक पवार की पत्नी तेजल ने निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया है. कुल मिलाकर, गठबंधन होने के बावजूद इन फ्रेंडली फाइट्स ने चुनावी समीकरणों को उलझा दिया है. इसके कारण मतदाताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
BMC चुनाव में ‘मराठी पहचान’ सबसे बड़ा दांवबीएमसी चुनाव की सभी 227 सीटों पर सबसे ज्यादा उम्मीदवार मराठी ही है. बीएमसी में लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस बार सुरक्षित रणनीति अपनाते हुए पहचान की राजनीति, खासकर भाषाई पहचान को तवज्जो दी है. नतीजतन, उम्मीदवारों की सूची में मराठी भाषी उम्मीदवारों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है. सभी पार्टी के सीटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल उम्मीदवारों में दो-तिहाई से अधिक मराठी बोलने वाले हैं. इसके बाद मुस्लिम और उत्तर भारतीय समुदाय के उम्मीदवारों की संख्या आती है.