प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा2023 के पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ED ने 14 जनवरी 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड राजीव नयन मिश्रा समेत कुल 18 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. यह चार्जशीट लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में स्थित PMLA की विशेष अदालत में दाखिल की गई है.
ED ने यह जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 166/2024 (दिनांक 06.03.2024) के आधार पर शुरू की थी, जो मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में दर्ज हुई थी. जांच के दौरान इस मामले से जुड़ी कई अन्य एफआईआर भी सामने आईं, जिन्हें जांच में शामिल किया गया.आरोप है कि पेपर लीक के जरिए संगठित गिरोह ने करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की. इस रकम को अलग-अलग खातों, बिचौलियों और माध्यमों से घुमाकर मनी लॉंडरिंग की गई. मामले में कई बैंक खातों, संपत्तियों और डिजिटल सबूतों की जांच की गई.
फरवरी 2024 में आयोजित हुई थीं परीक्षाएंएफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने साजिश रचकर यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा2023 और यूपी आरओ/एआरओ परीक्षा2023 के प्रश्नपत्र लीक किए. लीक हुए प्रश्नपत्र पैसे लेकर उम्मीदवारों को बेचे गए. उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र और उनके जवाब पहले ही दे दिए गए थे, जिन्हें उन्होंने परीक्षा से पहले याद कर लिया. ये परीक्षाएं फरवरी 2024 में आयोजित हुई थीं.
1.02 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्तजांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरओ/एआरओ परीक्षा के पेपर लीक से मिली रकम का इस्तेमाल कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक कराने में किया गया. जांच के दौरान ED ने करीब 1.02 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के रूप में चिन्हित किया और 6 अगस्त 2024 को इन्हें अस्थायी रूप से अटैच किया. बाद में दिल्ली स्थित PMLA की निर्णायक प्राधिकरण ने इस कार्रवाई की पुष्टि कर दी.
ED की आगे की जांच जारीइसके अलावा जांच के दौरान दो आरोपी रवि अत्री और सुभाष प्रकाश को 18 नवंबर 2024 को ED की हिरासत में लिया गया था. इससे पहले 10 जनवरी 2025 को सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिस पर अदालत ने संज्ञान ले लिया है और मामला फिलहाल विचाराधीन है. इस मामले में ED की आगे की जांच जारी है.
इनपुट/ अभिजीत