लखनऊ में निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने और पंजीकरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने के उद्देश्य से विभिन्न लेबर अड्डों पर जागरूकता एवं पंजीयन शिविरों का आयोजन किया गया। मोहनलालगंज, बुद्धेश्वर और आशियाना के बाराबिरवा क्षेत्र में आयोजित इन शिविरों में श्रमिकों को उनके लिए उपलब्ध कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई और पात्र श्रमिकों का मौके पर पंजीकरण तथा नवीनीकरण कराया गया।
इन शिविरों के माध्यम से कन्या विवाह सहायता, मातृत्व एवं शिशु सहायता, शिक्षा प्रोत्साहन, गंभीर बीमारी सहायता, तथा मृत्यु एवं दिव्यांगता से जुड़ी योजनाओं सहित कई कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की गई। आयोजकों का कहना है कि बड़ी संख्या में श्रमिकों ने इन योजनाओं में रुचि दिखाई और पंजीकरण प्रक्रिया का लाभ उठाया। कई श्रमिकों ने पहली बार योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
शिविरों में शिक्षा से संबंधित पहलों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। श्रमिकों को उनके बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के अवसरों के बारे में अवगत कराया गया, ताकि वे शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए समय रहते आवेदन कर सकें। इसके तहत न्यूनतम पात्रता अवधि पूरी कर चुके श्रमिकों को अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए आवेदन करने को प्रोत्साहित किया गया।
आयोजन के दौरान श्रम विभाग के अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने श्रमिकों को यह भी बताया कि किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण और समय पर नवीनीकरण आवश्यक है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सीएससी केंद्रों और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के शिविरों का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार नहीं, बल्कि श्रमिकों को प्रक्रियात्मक जानकारी देना भी है ताकि वे बिचौलियों पर निर्भर हुए बिना स्वयं आवेदन कर सकें। शिविरों में मौजूद श्रमिकों ने मौके पर मिलने वाली सुविधाओं को उपयोगी बताया और कहा कि इससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।
कार्यक्रमों की निगरानी और दिशा-निर्देशन राज्य स्तर पर तय नीतियों के अनुरूप किया गया, जिनमें योगी आदित्यनाथ के निर्देशों का उल्लेख भी किया गया। आयोजन में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की प्रमुख भूमिका रही, जबकि शिक्षा से जुड़े विकल्पों में अटल आवासीय विद्यालय का जिक्र किया गया।