
कोच्चि, 15 जनवरी . केरल के काजू व्यापारियों को तंजानिया से कम कीमत पर काजू उपलब्ध कराने का झूठा वादा करके उनसे 24 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने वाले कारोबारी को ईडी ने राज्य के एर्नाकुलम से गिरफ्तार किया है. एक आधिकारिक बयान में Thursday को यह जानकारी दी गई.
Enforcement Directorate (ईडी) के कोच्चि क्षेत्रीय कार्यालय ने कोल्लम निवासी 35 वर्षीय अनीश बाबू को 14 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया.
Thursday को उन्हें एर्नाकुलम स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 19 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
ईडी ने केरल Police द्वारा दर्ज और कोल्लम स्थित अपराध शाखा द्वारा पुनः दर्ज की गई कई First Information Report के आधार पर मामले की जांच शुरू की, जिनमें काजू व्यापारियों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था.
ईडी ने बताया कि यह खुलासा हुआ है कि अनीश बाबू ने अपनी कंपनियों, जैसे कि बी सदर्न ट्रेड लिमिटेड (तंजानिया), प्रेज एक्सपोर्ट्स एफजेडई (शारजाह), और वझाविला काजू (कोल्लम), के माध्यम से कई व्यापारियों को तंजानिया/अफ्रीका से कच्चे काजू के आयात और आपूर्ति के झूठे वादे पर भारी मात्रा में धन देने के लिए प्रेरित किया.
ईडी की जांच में पता चला कि विभिन्न शिकायतकर्ताओं से लगभग 24.76 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि ली गई थी. हालांकि, न तो काजू की आपूर्ति की गई और न ही अग्रिम राशि वापस की गई.
ईडी के बयान में कहा गया है कि इसके बजाय, पीड़ितों को गुमराह करने के लिए बिल ऑफ लैडिंग, स्विफ्ट संदेश और चेक जैसे जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज उपलब्ध कराए गए.
ईडी ने कहा कि जांच के दौरान अनीश बाबू को 2021 से पीएमएलए की धारा 50 के तहत बार-बार समन जारी किए गए. 3 जनवरी, 2025 को एक बार पेश होने के अलावा उनका व्यवहार असहयोगी और टालमटोल वाला रहा.
वह लगातार दस्तावेज पेश करने में विफल रहे और जांच में सहयोग करने से बचते रहे. इसमें कहा गया है कि उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं एर्नाकुलम सत्र न्यायालय, केरल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई थीं.
14 जनवरी, 2026 को ईडी कार्यालय में अनीश बाबू का बयान दर्ज किया गया, जिसमें उन्होंने टालमटोल भरे जवाब दिए और अपराध से प्राप्त धन के उपयोग और विदेशों में जमा करने से संबंधित महत्वपूर्ण विवरणों का खुलासा करने में विफल रहे. साक्ष्यों से छेड़छाड़, गवाहों पर प्रभाव और कानूनी प्रक्रिया से बचने की संभावना को देखते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने अनीश बाबू की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राय दी थी कि धन के लेन-देन का पता लगाने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है.
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एमएस/