Shukra Pradosh Vrat Katha: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये कथा, दूर होंगे जीवन के सभी कष्ट!
TV9 Bharatvarsh January 16, 2026 02:43 PM

Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi: आज माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रदोष व्रत है. ये व्रत भगवान शिव को समर्पित किया गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की प्रदोष काल में पूजा की जाती है. मान्यता है कि प्रदोष व्रत और भगवान शिव का पूजन करने से जीवन के सभी संकट कट जाते हैं.

साथ ही महादेव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है. दोनों की कृपा और आशीर्वाद से जीवन में सदा सुख-समृद्धि बनी रहती है. आज शुक्रवार है. ऐसे में आज शुक्र प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत बिना पूजा में कथा का पाठ किए या सुने पूरा नहीं माना जाता है, इसलिए प्रदोष व्रत के दिन पूजा के समय कथा का पाठ अवश्य करना या सुनना चाहिए. ऐसे में आइए जान लेते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की कथा.

शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha)

पुराणों में शुक्र प्रदोष व्रत की कथा का वर्णन किया गया है. प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में तीन दोस्त रहते थे. जिनमें एक मित्र ब्राह्मण, दूसरा धनिक और तीसरा राजा का बेटा था. तीनों गहरे दोस्त थे और तीनों का ही विवाह हो चुका था. हालांकि, धनिक मित्र का अभी तक गौना नहीं हुआ था. उसकी पत्नी मायके में ही थी. एक दिन तीनों दोस्त बैठकर बात कर रहे थे.

इसी दौरान ब्राह्मण दोस्त ने कहा कि जिस घर में महिला नहीं होती है वो भूतों का बसेरा बन जाता है. धनिक के पुत्र ने ये सुनते ही मन बना लिया कि वो अपनी पत्नी को मायके से लाएगा. फिर अगले दिन वो अपनी पत्नी को मायके से लाने के लिए तैयार होने लगा. जब धनिक पुत्र के माता-पिता को पता चला तो उन्होंने उससे कहा कि अभी शुक्र अस्त हैं, जो वैवाहिक जीवन की खुशियों का कारक माने जाते हैं.

ऐसे में तुम अभी अपनी पत्नी को मायके से वापस न लाओ, लेकिन धनिक पुत्र ने अपने माता-पिता की एक नहीं सुनी और वो अपनी पत्नी को लाने निकल गया. धनिक पुत्र के ससुराल पहुंचने पर वहां भी उसको उसके सास-ससुर ने वही बात समझाई जो उसको माता-पिता ने समझाई थी, लेकिन धनिक पुत्र अपनी जिद पर अड़ा रहा और अंत में सास-ससुर ने अपनी बेटी को विदा कर दिया.

दोनों पति-पत्नी जब बेलगाड़ी पर बैठकर जा रहे थे, उसी दौरान रास्ते में बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और साथ ही बैल की टांग भी टूट गई. उन दोनों को भी चोटें लगीं. आगे चलकर डाकुओं ने धनिक पुत्र का सारा धन भी लूट लिया. बड़ी मुश्किलों के साथ जब धनिक पुत्र और अपनी पत्नी के साथ घर पहुंचा तो उसको सांप ने काट लिया. उसके पिता वैद्य के पास उसे ले गए तो वैद्य ने तीन दिन बाद उसकी मृत्यु बता दी.

धनिक पुत्र को सांप काटने की बात जब उसके ब्राह्मण दोस्त को पता चली तो वो धनिक पुत्र से मिलने गया. उसने धनिक पुत्र के पिता से कहा कि वो अपने पुत्र और उसकी पत्नी को ससुराल वापस भेज दें. क्योंकि शुक्र अस्त हैं और वो अपनी पत्नी को लेकर आ गया है. ब्राह्मण पुत्र ने धनिक पुत्र के पिता से कहा कि उनके बेटे के सुसराल पहुंचने के बाद अगर वो शुक्र प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर लेते हैं, तो उनका पुत्र बच जाएगा.

इसके बाद धनिक पुत्र के पिता ने ब्राह्मण पुत्र की बात मानी और अपने पुत्र और उसकी पत्नी को ससुराल भेज दिया. फिर विधि-विधान से शुक्र प्रदोष व्रत रखा और भगवान शिव की पूजा की. इसके चलते चलते धनिक पुत्र की हालात ठीक हो गई और उसके जीवन के कष्ट दूर हो गया.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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