एक गलती और चली गई 250000 जीवों की जान… 1989 कीˈ वो रात, जब सिहर गया था अमेरिका﹒
Himachali Khabar Hindi January 17, 2026 08:42 AM

Exxon Valdez Oil Spill: कई बार हमसे कुछ ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिन्हें हम चाहकर भी ठीक नहीं कर सकते. 1989 में अमेरिका के अलास्का में ऐसा ही कुछ हुआ था. एक्सॉन वेल्डेज नाम का एक विशाल तेल टैंकर, जो कच्चे तेल से भरा था. रात के अंधेरे में एक चट्टान से टकरा गया. इससे लाखों गैलन तेल समुद्र में फैल गया, जो न सिर्फ मछलियों, पक्षियों और समुद्री जीवों के लिए मौत का पैगाम लेकर आया, बल्कि पूरे इलाके की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. इसे इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है- एक्सॉन वाल्डी ऑयल स्पिल. चलिए आपको पूरी कहानी बताते हैं.

24 मार्च 1989 की रात थी. अलास्का के प्रिंस विलियम साउंड इलाके में ‘एक्सॉन वाल्डीज’ नाम का एक बड़ा तेल टैंकर अमेरिका की बड़ी तेल कंपनी Exxon Corporation का था. यह जहाज पोर्ट वाल्डीज से रवाना हुआ था और उसमें करीब 53 मिलियन गैलन कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) भरा हुआ था. लेकिन रात के करीब 12 बजकर 4 मिनट पर जहाज ब्लाइ रीफ (Bligh Reef) नाम की एक चट्टान से जा टकराया.

11 मिलियन गैलन तेल का रिसाव
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जहाज के नीचे के हिस्से में छेद हो गया और कुछ ही घंटों में करीब 11 मिलियन गैलन तेल समुद्र में फैल गया. काला चिपचिपा तेल लहरों के साथ दूर-दूर तक फैल गया और कुछ ही दिनों में 1300 किलोमीटर के दायरे में समुद्र का पानी जहरीला हो गया.

काले सागर में बदल गया पानी
तेल फैलने से लाखों मछलियां, समुद्री पक्षी, सील और व्हेल जैसी बड़ी प्रजातियां मर गईं. ठंडे पानी वाले इस इलाके में तेल जम जाने से उनका सांस लेना, तैरना और खाना ढूंढना लगभग नामुमकिन हो गया. रिपोर्टों के अनुसार, करीब 2,50,000 समुद्री पक्षी, 2,800 सील, 250 बाल्ड ईगल (अमेरिकी राष्ट्रीय पक्षी) और 22 ऑर्का व्हेल मारे गए.

प्रिंस विलियम साउंड, जो अपनी सुंदरता और स्वच्छ पानी के लिए मशहूर था अब एक काले सागर में बदल गया था. वहां के मछुआरे जो अपनी रोजी-रोटी के लिए समुद्र पर निर्भर थे, एक झटके में बेरोजगार हो गए. इलाके के पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान पहुंचा.

जहाज के कप्तान की थी गलती
दुर्घटना के बाद जांच शुरू हुई. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। पाया गया कि जहाज के कप्तान जोसेफ हेजलवुड (Joseph Hazelwood) ने शराब पी रखी थी और जहाज की दिशा सही तरीके से नहीं संभाली थी. साथ ही, Exxon कंपनी पर यह आरोप भी लगा कि उसने जहाज पर पर्याप्त स्टाफ नहीं रखा था और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की थी. कई सालों तक अदालतों में मुकदमे चले. कंपनी को भारी जुर्माना भरना पड़ा और पर्यावरण सुधार कार्यों में हिस्सा लेना पड़ा.

2 बिलियन डॉलर सफाई पर खर्च
तेल की सफाई का काम शुरू हुआ, लेकिन यह आसान नहीं था. हजारों लोग, नावें और मशीनें दिन-रात जुटी रहीं. Exxon ने लगभग 2 बिलियन डॉलर सफाई पर खर्च किए, लेकिन पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना था कि समुद्र की मूल स्थिति लौटने में कई दशक लग गए. कुछ इलाकों में आज भी मिट्टी और रेत के नीचे तेल के अंश पाए जाते हैं. इसके घटना के बाद अमेरिका ने अपने समुद्री कानूनों में बदलाव किए और Oil Pollution Act 1990 पारित किया, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सके.

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