भारत में 331 साल तक राज करने वाले मुगल आज भी शोध का विषय हैं. जब वे सत्ता के चरम पर थे तब भी चर्चा में थे, जब उनका अवसान हुआ, गिरावट आई, चर्चा में तब भी थे. ऐसी ही एक घटना की चर्चा आज भी होती है, जब ईरान के बादशाह नादिर शाह ने मुगल सत्ता की नींव हिला दी और बहुत संपदा लूट कर ले गया. यह वह दौर था जब औरंगजेब की मृत्यु हो चुकी थी. उस समय मुहम्मद शाह का शासन था.
नादिर शाह का भारत पर आक्रमण और मुगलों से की गई लूट भारतीय इतिहास की सबसे विनाशकारी घटनाओं में से एक मानी जाती है. साल 1739 में हुए इस आक्रमण ने न केवल मुगल साम्राज्य की कमर तोड़ दी, बल्कि भारत की अपार धन-संपदा को भी विदेशी हाथों में सौंप दिया.
आज जब ईरान में चारों ओर अशांति है. देश में जनता सड़कों पर है तो यह जान लेना रोचक होगा कि उस देश के बादशाह नादिर शाह ने इतनी दूरी तय करके कैसे भारत पर हमला करके लूटपाट की होगी? क्या-क्या लूटा होगा? भारतीय मुगल इतिहास की जब भी चर्चा होती है तो नादिर शाह के हमले को महत्वपूर्ण तरीके से उकेरा जाता है. आइए, जानते हैं कि आखिर नादिर शाह ने क्या-क्या लूटा था?
नादिर शाह का आक्रमण18वीं शताब्दी की शुरुआत में मुगल साम्राज्य अपनी ढलान पर था. औरंगजेब की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के युद्धों और कमजोर शासकों ने साम्राज्य को खोखला कर दिया था. 1739 में फारस (ईरान) के शासक नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण किया. करनाल के युद्ध में मुगल सम्राट मुहम्मद शाह ‘रंगीला’ की सेना बुरी तरह पराजित हुई. इसके बाद नादिर शाह दिल्ली में दाखिल हुआ. उसी समय एक अफवाह फैली कि नादिर शाह मारा गया और फारसी सेना वापसी कर रही है.
नादिर शाह.
ऐसे में जनता ने फारसी सेना के जवानों पर हमला कर दिया. सच्चाई यह थी कि नादिर शाह करनाल में युद्ध जीत चुका था, उसका उत्साह बढ़ा हुआ था. जब उसे अपनी मौत की सूचना मिली तो उसने कत्लेआम का आदेश दिया, जिसमें हजारों निर्दोष लोग मारे गए. इसके बाद शुरू हुई वह लूट, जिसने दिल्ली को कंगाल बना दिया.
मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस)नादिर शाह द्वारा लूटी गई सबसे कीमती चीजों में शाहजहां द्वारा बनवाया गया मयूर सिंहासन या ‘तख्त-ए-ताऊस’ था. यह सिंहासन मुगल वैभव का प्रतीक था. इस सिंहासन को बनाने में सात साल लगे थे और इसमें भारी मात्रा में सोना और बेशकीमती रत्न जड़े थे. इतिहासकारों के अनुसार, उस समय इसकी कीमत करोड़ों रुपयों में थी. इसमें पन्ने, माणिक, हीरे और मोती जड़े हुए थे. इसके ऊपरी हिस्से पर दो मोर बने हुए थे, जिनकी पूंछ रत्नों से सजी थी. नादिर शाह इसे अपने साथ ईरान ले गया. बाद में इसे तोड़ दिया गया और इसके रत्नों का उपयोग अन्य आभूषणों में किया गया, लेकिन यह आज भी मुगल काल की सबसे बड़ी लूट मानी जाती है.
शाहजहां द्वारा बनवाया गया मयूर सिंहासन जिसे ‘तख्त-ए-ताऊस’ कहते हैं. फोटो: Heritage Art/Heritage Images via Getty Images
कोहिनूर हीरादुनिया का सबसे प्रसिद्ध हीरा ‘कोहिनूर’ भी नादिर शाह की लूट का हिस्सा था. कहा जाता है कि नादिर शाह को पता चला कि मुहम्मद शाह ने अपनी पगड़ी में एक बेशकीमती हीरा छिपा रखा है. नादिर शाह ने चतुराई से पगड़ी बदलने की रस्म का प्रस्ताव रखा और इस तरह कोहिनूर उसके हाथ लगा. जब नादिर शाह ने पहली बार इस चमकते पत्थर को देखा, तो उसके मुंह से निकला कोह-इ-नूर, जिसका फारसी में अर्थ होता है रोशनी का पर्वत. कोहिनूर के साथ-साथ उसने दरिया-ए-नूर (नूर का दरिया) नामक एक और विशाल हीरा भी लूटा.
मुगलों का कोहिनूर हीरा अब ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है.
सोना, चांदी और नकदीनादिर शाह ने दिल्ली के शाही खजाने को पूरी तरह खाली कर दिया था. उसने मुगल खजाने से भारी मात्रा में सोने और चांदी के सिक्के लूटे. अनुमान लगाया जाता है कि उसने लगभग 70 करोड़ रुपये की नकद राशि और सिक्के लूटे थे. शाही रसोई और महलों से सोने-चांदी के बर्तन, जड़ाऊ तलवारें, ढालें और शाही महिलाओं के बेशकीमती आभूषण भी लूट लिए गए. नादिर शाह ने केवल शाही खजाने को ही नहीं लूटा, बल्कि दिल्ली के रईसों, व्यापारियों और आम जनता से भी भारी जुर्माना वसूला. जो लोग पैसा देने में असमर्थ थे, उन्हें प्रताड़ित किया गया.
हाथी, घोड़े और ऊंटलूट के माल को ढोने के लिए नादिर शाह को हजारों जानवरों की जरूरत पड़ी. वह अपने साथ सैकड़ों प्रशिक्षित हाथी ले गया, जिनका उपयोग युद्ध और भारी सामान ढोने में किया जाता था. मुगल अस्तबल से बेहतरीन नस्ल के हजारों घोड़े और ऊंट भी फारस ले जाए गए. कहा जाता है कि लूट इतनी विशाल थी कि उसे ले जाने के लिए हजारों ऊंटों और घोड़ों का काफिला कई मील लंबा था.
शिल्पकार और दासनादिर शाह केवल धन ही नहीं, बल्कि भारत की प्रतिभा को भी अपने साथ ले जाना चाहता था. उसने सैकड़ों राजमिस्त्री, बढ़ई, पत्थर तराशने वाले कारीगरों और संगीतकारों को बंदी बनाया और उन्हें ईरान ले गया ताकि वे वहां भी मुगल शैली की इमारतें और कलाकृतियां बना सकें. हजारों सुंदर महिलाओं और पुरुषों को दास बनाकर फारस ले जाया गया.
लाल किला.
लूट का प्रभावनादिर शाह की इस लूट का प्रभाव भारत और ईरान दोनों पर पड़ा. इस लूट ने मुगल साम्राज्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह कर दिया. इसके बाद मुगल कभी संभल नहीं पाए और धीरे-धीरे क्षेत्रीय शक्तियां और बाद में अंग्रेज हावी हो गए. नादिर शाह इतना धन ले गया था कि उसने ईरान लौटने के बाद वहां की जनता का तीन साल तक का कर माफ कर दिया था. भारत ने अपनी सदियों से संचित कला और वैभव का एक बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए खो दिया.
नादिर शाह की लूट केवल धन की लूट नहीं थी, बल्कि यह एक महान साम्राज्य के अपमान और पतन की कहानी थी. मयूर सिंहासन और कोहिनूर जैसे रत्न आज भी उस वैभव की याद दिलाते हैं जो कभी भारत की शान हुआ करते थे. नादिर शाह द्वारा ले जाया गया यह खजाना आज भी दुनिया की सबसे बड़ी ऐतिहासिक लूटों में गिना जाता है.
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