हार में भी कांग्रेस को मिली 'जीत'! महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों से राहुल-खरगे को क्या मैसेज मिला?
TV9 Bharatvarsh January 17, 2026 08:43 PM

महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए बड़ी जीत है. ये बड़ी जीत इसलिए साबित हुई क्योंकि 25 साल से ज्यादा समय तक मुंबई शिवसेना का गढ़ बना रहा और अब बीजेपी ने इसे अपने नाम कर लिया है. वहीं बीजेपी और ठाकरे परिवार के बीच इस बड़ी लड़ाई के बीच कांग्रेस का प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा. कांग्रेस की इस जीत से राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अच्छा मैसेज मिला है.

यह चुनाव कम से कम चार पार्टियों के लिए सोचने का विषय बन गया. शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS, जिन्होंने मिलकर बालासाहेब ठाकरे की विरासत का फायदा उठाने की कोशिश की. वहीं NCP के दो विरोधी गुट, जो अस्थायी ‘विलय’ के बावजूद पुणे, पिंपरी-चिंचवड के गढ़ में समर्थन हासिल करने में नाकाम रहे.

कांग्रेस को कितनी सीट पर मिली जीत?

कांग्रेस ने लोकल चुनावों में अकेले चुनाव लड़ा और मुंबई में कोई खास कमाल नहीं कर पाई. लेकिन राज्य में नगर निगम चुनावों में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन ठाकरे भाइयों के गठबंधन या पवारों से बेहतर रहा. अकेले चुनाव लड़ने और कुल 2,869 सीटों में से सिर्फ 528 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद, पुरानी पार्टी 29 नगर निगमों में 317 सीटें जीतने में कामयाब रही.

महाराष्ट्र निकाय चुनावों में BJP 1441 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना 408 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर और कांग्रेस 317 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही.

1999 के बाद बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ा

BJP ने मुंबई, नवी मुंबई, नासिक, पुणे, पनवेल, कल्याण डोंबिवली, नागपुर में दबदबा बनाया. राज्य में पार्टी का प्रदर्शन काफी शानदार रहा, क्योंकि पार्टी ने मुंबई, ठाणे, पुणे, छत्रपति संभाजी नगर और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगमों में 528 सीटों पर चुनाव लड़ा था. गठबंधन बदलने और पुरानी परंपराओं के कारण 1999 के बाद यह पहली बार है जब पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया.

महाराष्ट्र में कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला तब आया जब उद्धव ठाकरे के राज ठाकरे के साथ गठबंधन करने और शरद पवार के गुट के अजीत पवार के गुट के साथ हाथ मिलाने के बाद महा विकास अघाड़ी टूट गई. कांग्रेस शायद 2019 में महाराष्ट्र में अपने चरम पर थी, जब चुनाव के बाद बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूट गया था. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना ने कांग्रेस और अविभाजित NCP के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई थी.

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