भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता: एक नई शुरुआत
newzfatafat January 21, 2026 07:43 PM

भारत और यूरोपीय संघ के बीच लम्बे समय से रुका हुआ फ्री ट्रेड समझौता अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस सम्मेलन में यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने संकेत दिया है कि यह समझौता लगभग अंतिम रूप में है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। यह डील लगभग 2 अरब लोगों के लिए एक साझा बाजार बनाएगी और वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा कवर करेगी। उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 25 से 27 जनवरी तक भारत का दौरा करेंगे और गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि होंगे। 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता में इस ऐतिहासिक समझौते पर अंतिम मुहर लग सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है, जबकि यूरोप को एशिया में एक मजबूत रणनीतिक बढ़त मिलेगी। 


मदर ऑफ ऑल डील्स का महत्व क्यों कहा जा रहा है मदर्स ऑफ ऑल डील्स 

यह समझौता अमेरिका को भी एक संदेश देने का प्रयास है, खासकर जब यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। भारत नए साझेदारों की तलाश में है, और इस साझेदारी में भारत का नाम सबसे ऊपर है। इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है, क्योंकि यह 2 अरब लोगों के लिए एक बड़ा बाजार बनाएगी और वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई हिस्सा दर्शाएगी। भारत, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, को यूरोपीय संघ के साथ जोड़कर यह डील वैश्विक व्यापार की दिशा को बदल सकती है, खासकर जब सरकारें अपनी आर्थिक निर्भरता पर नए सिरे से विचार कर रही हैं।


भारत में निवेश के अवसर भारत इन्वेस्टमेंट के लिए एक अच्छा डेस्टिनेशन

दावोस में विश्व के नेताओं की उपस्थिति में, यूरोपीय संघ की अध्यक्ष ने कहा है कि हम भारत के साथ एक महत्वपूर्ण डील करने जा रहे हैं, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है। यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि हमारी डील अंतिम चरण में है। भारत निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य है, और यह डील 2 अरब लोगों के लिए लाभकारी होगी। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या और यूरोप की 6 अरब की जनसंख्या मिलकर 2 अरब बनाते हैं। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि यूरोपीय संघ के देशों के लिए भी फायदेमंद होगा, क्योंकि भारत से कई उत्पादों का निर्यात किया जा सकेगा। यदि यह डील सफल होती है, तो यूरोपीय संघ के लिए एक बड़ा बाजार खुल जाएगा। हालांकि, वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ से बहुत अधिक आयात नहीं करता है, लेकिन कुछ उत्पाद जैसे वाइन और गाड़ियाँ इस डील से प्रभावित होंगे।


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