दक्षिण भारतीय सिनेमा के पितामह: अक्किनेनी नागेश्वर राव की अनकही कहानी
Stressbuster Hindi January 22, 2026 06:42 AM
दक्षिण भारतीय सिनेमा का महानायक

मुंबई, 21 जनवरी। आज दक्षिण भारतीय सिनेमा ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना ली है। इस क्षेत्र के विकास में अक्किनेनी नागेश्वर राव (एएनआर) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने तेलुगू और तमिल फिल्मों में अद्वितीय अभिनय किया, साथ ही हिंदी और कन्नड़ सिनेमा में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।


एएनआर ने 'अन्नपूर्णा स्टूडियोज' की स्थापना कर तेलुगू फिल्म उद्योग को नई दिशा दी। उनका जन्म 20 सितंबर 1923 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के रामपुरम गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। आर्थिक कठिनाइयों के चलते उनकी शिक्षा केवल तीसरी कक्षा तक ही सीमित रही, लेकिन अभिनय के प्रति उनका जुनून उन्हें 10 साल की उम्र में रंगमंच पर ले आया। उस समय महिलाओं के अभिनय पर रोक होने के कारण, उन्होंने स्त्री भूमिकाएं भी निभाईं।


1941 में तेलुगू फिल्म 'धर्मपत्नी' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले एएनआर ने 73 वर्षों में 255 से अधिक फिल्मों में काम किया। 1950 के दशक में तमिल सिनेमा में कदम रखा, और 1954 में 'विप्र नारायण' उनकी पहली प्रमुख भूमिका वाली फिल्म बनी।


उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपनी छाप छोड़ी। 1956 में 'तेनाली रामकृष्ण' (तमिल संस्करण) में उनके किरदार ने उन्हें व्यापक प्रशंसा दिलाई। इस फिल्म को ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट फॉर बेस्ट फीचर से भी सम्मानित किया गया। उनकी अभिनय शैली में संवाद, नृत्य और भाव-भंगिमाओं का अद्भुत संतुलन दर्शकों को भाता था।


एएनआर केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक सफल निर्माता भी थे। उन्होंने तेलुगू फिल्म उद्योग को मद्रास (चेन्नई) से हैदराबाद स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1976 में 'अन्नपूर्णा स्टूडियोज' की स्थापना की, जो उनकी पत्नी अन्नपूर्णा के नाम पर रखा गया। यह स्टूडियो 22 एकड़ में फैला है और तेलुगू सिनेमा को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण रहा।


उनकी कई प्रसिद्ध फिल्मों में 'लैला मजनू', 'देवदासु', 'अनारकली', 'मंगल्या बालम', 'प्रेमा नगर', और 'मेघसंदेसम' शामिल हैं। सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले, जैसे 1968 में पद्मश्री, 1988 में पद्म भूषण, 1990 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड, और 2011 में पद्म विभूषण।


इसके अलावा, 1992 में उन्हें तमिलनाडु स्टेट फिल्म ऑनरेरी अवॉर्ड अरिग्नार अन्ना अवॉर्ड भी मिला। उनका परिवार आज भी दक्षिण सिनेमा में सक्रिय है, उनके बेटे नागार्जुन और पोते नागा चैतन्य अभिनेता हैं। 2014 में रिलीज हुई 'मनम' में तीन पीढ़ियां एक साथ नजर आईं। 22 जनवरी 2014 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।


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