गावस्कर ने विराट और नीतीश रेड्डी की साझेदारी को सराहा; कहा- कोहली को दूसरे छोर से नहीं मिला पर्याप्त साथ।
The Sports Tak January 22, 2026 02:47 PM

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में भारत की 41 रनों की हार के बाद, पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने टीम की बल्लेबाजी पर गहरा विश्लेषण साझा किया है। गावस्कर ने विशेष रूप से विराट कोहली और युवा ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी के बीच हुई 88 रनों की साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि जब टीम इंडिया एक समय 71 रनों पर 4 विकेट खोकर गहरे संकट में थी, तब कोहली और रेड्डी ने पारी को संभाला और उम्मीद जगाई थी।

गावस्कर के अनुसार, न्यूज़ीलैंड द्वारा दिए गए 338 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की सबसे बड़ी समस्या 'शुरुआत' रही। उन्होंने कहा, "जब तक विराट कोहली क्रीज पर थे और उन्हें दूसरे छोर से थोड़ा सहयोग मिल रहा था, तब तक लक्ष्य हासिल करना संभव लग रहा था। लेकिन कोहली को वह 'सबस्टेंशियल सपोर्ट' (मजबूत साथ) नहीं मिला जिसकी उन्हें जरूरत थी।" गावस्कर ने नीतीश कुमार रेड्डी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी 53 रनों की पारी के साथ अपनी काबिलियत के साथ न्याय करना शुरू कर दिया है। रेड्डी ने मुश्किल परिस्थितियों में कोहली का साथ दिया और दिखाया कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की क्षमता है।

हालांकि, गावस्कर ने टीम की 'कोहली पर निर्भरता' को लेकर चेतावनी भी दी। उन्होंने तर्क दिया कि जब विराट कोहली और नीतीश रेड्डी की साझेदारी टूटी, तो भारत की जीत की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। गावस्कर ने कहा कि रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ी ने तो अपनी भूमिका निभाई, लेकिन अनुभवी मध्यक्रम के अन्य बल्लेबाज कीवी स्पिनरों के सामने टिक नहीं सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हर्षित राणा जैसे निचले क्रम के बल्लेबाजों से आप हर बार चमत्कार की उम्मीद नहीं कर सकते।

गावस्कर ने अंत में निष्कर्ष निकाला कि भारत की असली समस्या सलामी जोड़ी का जल्दी आउट होना और कोहली के आउट होने के बाद मध्यक्रम का ढह जाना है। उन्होंने कहा कि 338 जैसे बड़े स्कोर का पीछा करने के लिए केवल एक बड़ी साझेदारी काफी नहीं है, बल्कि शीर्ष पांच बल्लेबाजों में से कम से कम दो को बड़ी पारियां खेलनी होंगी। नीतीश कुमार रेड्डी के लिए यह मैच एक सीखने का अनुभव रहा, क्योंकि उन्होंने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज (कोहली) के साथ बल्लेबाजी की, लेकिन टीम इंडिया को सीरीज बचाने के लिए इससे कहीं अधिक सामूहिक प्रयास की जरूरत थी। गावस्कर का यह बयान भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह टीम की रणनीतिक कमियों को उजागर करता है।


 
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