देशभर की विधायी संस्थाओं के अनुभव और नवाचार साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन लखनऊ में हुआ। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, प्रशासनिक नवाचार और जनसंपर्क के अनुभव साझा किए।
समापन समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सम्मेलन में विधायकों और पीठासीन अधिकारियों के अनुभवों को सुनने और समझने का अवसर मिला, जिससे संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकसित ‘UP Vision 2047’ डॉक्यूमेंट की सराहना की और इसे व्यापक दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से विकास की दिशा निर्धारित करने का प्रेरक उदाहरण बताया।
यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है और इसमें जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुभव अन्य राज्यों में साझा किए जाने चाहिए, ताकि इससे पूरे देश में विधायी प्रक्रियाओं की गुणवत्ता बढ़ सके।
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारियों ने विधानसभा की कार्यवाही में नवाचार और सुधार के प्रयासों को साझा किया। हरिवंश ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधायकों की उपस्थिति बढ़ाने और सोशल मीडिया के माध्यम से सदन की गतिविधियों को आमजन तक पहुँचाने के प्रयासों की भी सराहना की।
सतीश महाना ने कहा कि सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि भले ही राज्यों की कार्यशैली अलग हो, लेकिन उद्देश्य समान है – जनता के हित और विकास। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन में साझा अनुभव और सीखने के अवसर राज्य प्रशासन और विधायी प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाने में मदद करेंगे।
सम्मेलन में विचार विमर्श का केंद्र लोकतंत्र की मजबूती, जनहित की सर्वोच्चता और प्रशासनिक सुधार रहे। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक और विधायी अनुभवों का साझा करना नीति निर्माण और संसदीय कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।