योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन में विधायिका की भूमिका और लोकतंत्र पर जोर दिया
Indiatimes January 22, 2026 06:43 PM

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने सम्मेलन में शामिल सभी अतिथियों का स्वागत किया और विधायिका की लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायिका केवल कानून बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में न्याय, समता और बंधुता जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित करने का प्लेटफॉर्म भी है। उन्होंने बताया कि विधानसभाओं और विधान परिषदों के सदन संचालन में सुधार के प्रयास देश में लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में योगदान करते हैं।

सीएम योगी ने सदन संचालन और प्रश्नकाल सुधार पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में अब प्रत्येक प्रश्न के साथ अनुपूरक प्रश्न पूछने की व्यवस्था है, जिससे अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों को सहभागिता का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सुधार संसद की कार्यप्रणाली से प्रेरित है।

सम्मेलन में ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ और ‘आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ पर भी चर्चा हुई। इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के करीब 300 सदस्य शामिल हुए और विभिन्न विकास मुद्दों पर सुझाव प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने बताया कि जनता से सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल तैयार किया गया, जिस पर लगभग 98 लाख लोगों के विचार प्राप्त हुए। इन सुझावों को आईआईटी कानपुर के सहयोग से विजन डॉक्यूमेंट में शामिल किया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीठ और सरकार का दृष्टिकोण प्रोएक्टिव होना चाहिए। उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद के अध्यक्षों की कार्यप्रणाली की सराहना की और इस प्रकार के सम्मेलन को सीखने और साझा करने का मंच बताया।

सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह समेत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया और बताया कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा और विधान परिषद अब पेपरलेस हो गई हैं। उन्होंने सदन में जनप्रतिनिधियों के प्रशिक्षण और ई-विदान प्रणाली को भी महत्वपूर्ण बताया। इसके अलावा स्थायी विकास लक्ष्यों और मौलिक अधिकारों के कार्यान्वयन पर चर्चा के माध्यम से सदन में व्यापक संवाद की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया गया।

इस तरह, सम्मेलन ने विधायिका की प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और राज्य में लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए कई पहलुओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया।

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