मुंबई, 22 जनवरी। कई फिल्मी सितारे केवल अपने ग्लैमर के लिए नहीं जाने जाते, बल्कि उनकी जीवन की कहानियाँ भी लोगों को प्रेरित करती हैं। डिंपल कपाड़िया, जो 1980 के दशक में फिल्म 'बॉबी' से रातों-रात मशहूर हुईं, ने न केवल अन्य अभिनेत्रियों के साथ प्रतिस्पर्धा की, बल्कि अपने बचपन में कुष्ठ रोग से भी जूझा।
जब वह केवल 12 वर्ष की थीं, तब उन्हें इस बीमारी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण समाज ने उन्हें तिरस्कार किया। लेकिन डिंपल ने हार नहीं मानी। उन्होंने इलाज करवाया और पूरी तरह स्वस्थ होकर फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की। आज वह अपनी कहानी साझा करती हैं ताकि लोग समझ सकें कि कुष्ठ रोग कोई कलंक नहीं है, बल्कि इसका इलाज संभव है।
हर साल 23 जनवरी को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है और इससे प्रभावित लोगों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
कुष्ठ रोग एक पुरानी संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। इसे हैंसेन रोग भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी खोज 1873 में नॉर्वेजियन वैज्ञानिक गेरहार्ड हैंसेन ने की थी। यह मुख्य रूप से त्वचा, नसों, हाथ-पैर और कभी-कभी आंखों को प्रभावित करता है। इसके शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के या लाल धब्बे, सुन्नपन और घाव शामिल होते हैं। यदि समय पर इलाज किया जाए, तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है।
डिंपल कपाड़िया के अलावा, आर माधवन और अमिताभ बच्चन भी कुष्ठ रोग के खिलाफ जागरूकता फैलाने में सक्रिय हैं। इन सितारों का मानना है कि आज की सबसे बड़ी चुनौती बीमारी नहीं, बल्कि समाज का रवैया है। कुष्ठ रोग से ठीक हो चुके लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
इन हस्तियों का मानना है कि कुष्ठ रोग अब डरावनी बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि इसका इलाज संभव है। जरूरी है कि हम कलंक को खत्म करें और प्रभावित लोगों को प्यार और सम्मान दें।
डिंपल कपाड़िया ने खुद इस बीमारी का सामना किया है। उन्होंने बताया कि 12 साल की उम्र में उनकी कोहनी पर कुष्ठ रोग था। उस समय एक व्यक्ति ने उन पर तंज कसा था। लेकिन इसी कठिन समय में उन्हें फिल्म 'बॉबी' का मौका मिला। डिंपल का मानना है कि इस अनुभव ने उन्हें हिम्मत दी और यह साबित किया कि यह बीमारी शर्मिंदगी का कारण नहीं है।
मेगास्टार अमिताभ बच्चन भी लंबे समय से कुष्ठ रोग के खिलाफ जागरूकता फैला रहे हैं। उन्होंने 2018 में निप्पॉन फाउंडेशन द्वारा आयोजित वैश्विक अपील का समर्थन किया। अमिताभ का कहना है कि हमें उस सामाजिक भेदभाव को खत्म करना होगा जो कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के साथ होता है।
अभिनेता आर. माधवन भी इस विषय में गहराई से जुड़े हुए हैं। वह लेपरा इंडिया के गुडविल एंबेसडर हैं। माधवन का मानना है कि कुष्ठ रोग पूरी तरह इलाज योग्य है और किसी को भी इसके साथ जीवन नहीं जीना चाहिए। वह जागरूकता अभियानों के जरिए लोगों को समय पर जांच और इलाज के महत्व के बारे में बताते हैं।