भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच में लंबे समय से लंबित ट्रेड डील अगले हफ्ते होने की बात चल रही है. रिपोर्ट के मुताबित डील 27 जनवरी को साइन होनी है. मगर इससे पहले एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने यह संशय खड़ा कर किया है कि क्या ईयू के साथ डील अटक तो नहीं जाएगी. ऐसा हम क्यों कह रहे हैं आइए इसके बारे में डिटेल से समझते हैं.
यूरोपियन यूनियन (EU) ने भारत के एक्सपोर्ट पर एक बड़ा डिसीजन लिया है. 1 जनवरी 2026 से EU ने Generalised Scheme of Preferences (GSP) के तहत भारत को मिलने वाली टैरिफ छूट को अब सस्पेंड कर दिया है. इस फैसले से भारत के EU को होने वाले टोटल एक्सपोर्ट का करीब 87% हिस्सा प्रभावित होगा.
इन सेक्टर्स पर होगा असरइस छूट के खत्म होने से टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, केमिकल्स, प्लास्टिक, मेटल्स, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सामान और ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट जैसे मेजर सेक्टर्स पर अब फुल MFN (Most Favoured Nation) टैरिफ लगेगा. पहले इन प्रोडक्ट्स पर औसतन 20% कम टैक्स लगता था, जिससे इंडियन गुड्स EU मार्केट में सस्ते और कॉम्पिटिटिव रहते थे. अब ये बेनिफिट खत्म हो गया है, जिससे इंडियन एक्सपोर्टर्स की प्राइस कॉम्पिटिटिवनेस कमजोर पड़ सकती है.
बजट के बारे में कितना जानते हैं आप? यहां चेक करें अपना नॉलेज
नहीं है कोई बड़ी बात- सरकारइंडियन गवर्नमेंट का कहना है कि ये कोई नई बात नहीं है, क्योंकि 2016 से ही EU धीरे-धीरे GSP बेनिफिट्स कम करता आ रहा है. 2025 में भारत का EU को एक्सपोर्ट करीब 75-76 बिलियन डॉलर का था, जिसमें से पहले ही काफी हिस्सा छूट से बाहर था. अब सिर्फ एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और लेदर जैसे कुछ सेक्टर्स करीब 13% को ही GSP बेनिफिट मिल रहा है.
हालांकि, ट्रेड एक्सपर्ट्स और थिंक टैंक GTRI के मुताबिक ये भारत के लिए EU मार्केट में बड़ा झटका है. इससे बांग्लादेश और वियतनाम जैसे कंट्रीज से कॉम्पिटिशन और टफ हो जाएगा, क्योंकि उन्हें अभी भी GSP बेनिफिट मिल रहा है. ये डिसीजन ऐसे टाइम पर आया है जब भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की नेगोशिएशन्स तेज चल रही हैं और दोनों साइड जल्दी डील फाइनल करने की कोशिश में हैं.
यह भी पढ़ें- budget 2026: डिफेंस, कृषि और रेल नहीं, इस स्कीम को मिलेगा 18 हजार करोड़ का बजट!