भारत की नई बिजली नीति: एनईपी 2026 का मसौदा जारी
Gyanhigyan January 24, 2026 08:42 AM
नई बिजली नीति का मसौदा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बिजली क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (एनईपी) 2026 का मसौदा पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से मजबूत, पर्यावरण के अनुकूल और विश्वसनीय बिजली व्यवस्था प्रदान करना है। सरकार ने इस मसौदे पर सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। मसौदे में कोयले से उत्पन्न थर्मल बिजली के विकल्प के रूप में न्यूक्लियर पावर पर जोर दिया गया है। यह मसौदा SHANTI एक्ट लागू होने के बाद आया है, जो निजी कंपनियों के लिए न्यूक्लियर सेक्टर को खोलता है। नए मसौदे में भविष्य की बिजली नीति में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दे रहे हैं।


क्या बिजली की कीमतें बढ़ेंगी?

सरकार का कहना है कि मसौदे का उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बिजली व्यवस्था प्रदान करना है। हालांकि, आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य में बिजली महंगी होगी। क्या मुफ्त बिजली योजनाओं पर इसका असर पड़ेगा? मसौदे में इन सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं है, लेकिन भविष्य की संभावनाओं का अनुमान लगाया जा सकता है।


मसौदे के प्रमुख बिंदु

मसौदे के मुख्य बिंदुओं पर गौर करने पर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करने पर जोर दिया है और न्यूक्लियर एनर्जी पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे लागत में वृद्धि की संभावना है। इसके अलावा, बिजली दरों को एक उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ने का प्रस्ताव है, जिससे हर साल टैरिफ में संशोधन किया जा सकेगा। मसौदे में फिक्स्ड लागत की भरपाई के लिए डिमांड चार्ज लगाने का भी सुझाव दिया गया है।


नई नीति के विशेष पहलू

एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद, यह नई नीति 2005 में बनी मौजूदा एनईपी की जगह लेगी। इसके तहत सरकार का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट (किलोवाट-घंटे) और 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक करना है। ड्राफ्ट नीति के अनुसार, बिजली की जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए डिस्कॉम और एसएलडीसी राज्य स्तर पर रिसोर्स एडिक्वेसी (आरए) योजना तैयार करेंगे। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाएगा।


कार्बन उत्सर्जन में कमी

2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य है, और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की प्राप्ति के लिए स्वच्छ और कम कार्बन वाली ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ने की आवश्यकता है। ड्राफ्ट एनईपी 2026 में मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।


विवाद निपटान और वित्तीय स्वास्थ्य

ड्राफ्ट नीति में विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि विवाद जल्दी सुलझें और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो। इसके साथ ही, यह पावर सेक्टर की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए संरचनात्मक बदलावों का प्रस्ताव करती है। इसमें एक इंडेक्स-लिंक्ड ऑटोमैटिक टैरिफ रिवीजन मैकेनिज्म का सुझाव दिया गया है, जो तब लागू होगा जब बिजली रेगुलेटर समय पर टैरिफ को संशोधित करने में असफल होंगे।


नवीकरणीय ऊर्जा का समर्थन

यह नीति बाजार आधारित मैकेनिज्म और कैप्टिव पावर प्लांट के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को समर्थन देती है, जबकि वेरिएबल रिन्यूएबल एनर्जी की वृद्धि पर ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा भंडारण पर अधिक ध्यान दिया गया है। छोटे उपभोक्ताओं के लिए स्टोरेज की सुविधा डिस्कॉम के माध्यम से उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है।


न्यूक्लियर ऊर्जा का लक्ष्य

शांति अधिनियम 2025 के प्रावधानों के अनुसार, इसमें एडवांस न्यूक्लियर तकनीक, मॉड्यूलर रिएक्टर, छोटे परमाणु रिएक्टर और उद्योगों द्वारा परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।


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