नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस की 77वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए संविधान के निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक भविष्य में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। अपने भाषण में, उन्होंने अतीत की सफलताओं, वर्तमान की चुनौतियों, और भविष्य की संभावनाओं पर गहराई से विचार किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्म-विश्लेषण का अवसर भी है। यह दिन हमें यह सोचने का मौका देता है कि हमारा देश कहां से आया है, आज कहां खड़ा है, और भविष्य में किस दिशा में बढ़ना चाहता है। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया संविधान भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करता है।
राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान को विश्व के सबसे बड़े गणराज्य की नींव बताते हुए कहा कि इसमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूलभूत मूल्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता से ऐसे प्रावधान बनाए, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान की।
उन्होंने यह भी कहा कि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही हमने अपने भविष्य की दिशा तय करने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। 26 जनवरी 1950 से भारत ने अपने संवैधानिक आदर्शों के अनुसार एक गणराज्य के रूप में आगे बढ़ना शुरू किया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। आज महिलाएं पारंपरिक सीमाओं को पार करते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जो एक समावेशी और समानता आधारित समाज का संकेत है।
राष्ट्रपति ने बताया कि महिलाएं अब कृषि, उद्योग, विज्ञान, अंतरिक्ष, खेल और सशस्त्र बलों में अपनी पहचान बना रही हैं। खेल के क्षेत्र में भारतीय बेटियों ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत, नेत्रहीन महिला टी20 विश्व कप और शतरंज विश्व कप के ऑल-इंडियन फाइनल का उल्लेख करते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की प्रशंसा की और कहा कि सरकार और आम जनता के बीच की दूरी लगातार कम हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने जीएसटी को स्वतंत्रता के बाद का एक ऐतिहासिक आर्थिक सुधार बताया, जिसने 'एक राष्ट्र, एक बाजार' की अवधारणा को साकार किया। हालिया सुधारों से जीएसटी प्रणाली और अधिक प्रभावी होगी और अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अभियान में पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निर्णायक रूप से ध्वस्त किया गया और रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।